दवा से नहीं अब इससे बचेगी पशुओं की जान, फ्रूट थेरेपी बनी दुधारू पशुओं की नई संजीवनी

पशुओं का इलाज अब सिर्फ दवा और इंजेक्शन तक सीमित नहीं रहा. फ्रूट थेरेपी नाम की यह आधुनिक तकनीक कमजोर, बीमार और दुधारू पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है. सही समय पर दी गई यह थेरेपी पशु को ताकत देती है, हालात सुधारती है और जान भी बचा सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं फ्रूट थेरेपी का बारे में....

नोएडा | Updated On: 2 Jan, 2026 | 05:29 PM

Fruit Therapy: गांवों में पशुपालन करने वाले लोग अक्सर दवा, इंजेक्शन या घरेलू नुस्खों पर ही भरोसा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय में पशुओं का इलाज भी बिल्कुल इंसानों की तरह आधुनिक थेरेपी से किया जाता है? जी हां, इसे कहा जाता है फ्रूट थेरेपी. नाम सुनकर भले ही लगे कि इसमें फल खिलाए जाते होंगे, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा वैज्ञानिक और जरूरी है. यह थेरेपी कई बार कमजोर या बीमार पशुओं की जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है, खासकर दुधारू पशुओं के लिए.

क्या है फ्रूट थेरेपी

फ्रूट थेरेपी असल में एक मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें पशु को नस  के जरिए जरूरी तरल और ऊर्जा दी जाती है. जब किसी पशु को तेज दस्त, कमजोरी या शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है, तब केवल दवा से काम नहीं चलता. ऐसे में स्लाइन या ग्लूकोज के जरिए शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की भरपाई  की जाती है. यही प्रक्रिया पशु चिकित्सा में फ्रूट थेरेपी कहलाती है. इससे पशु का शरीर दोबारा संतुलन में आता है और हालत तेजी से सुधरने लगती है.

किन हालात में दी जाती है थेरेपी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब पशु को डायरिया हो जाता है तो उसके शरीर से पानी और नमक बहुत तेजी से बाहर निकल जाता है. इससे पशु सुस्त हो जाता है, खाना-पीना छोड़ देता है और कई बार खड़ा भी नहीं हो पाता. ऐसी स्थिति में फ्रूट थेरेपी बेहद जरूरी हो जाती है. इसके अलावा अगर पशु बहुत ज्यादा कमजोर हो जाए, अचानक दूध देना कम कर दे या शरीर में ताकत बिल्कुल न बचे, तब भी यह थेरेपी दी जाती है. गंभीर मामलों में यह इलाज जीवनरक्षक साबित होता है.

ठंड और मौसम में क्यों जरूरी

ठंड के मौसम  में या अचानक मौसम बदलने पर पशुओं में कोल्ड शॉक का खतरा बढ़ जाता है. खासकर सर्दियों में जब तापमान तेजी से गिरता है, तब कई पशु इस झटके को सहन नहीं कर पाते. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे समय पर फ्रूट थेरेपी के जरिए पशु के शरीर का तापमान और संतुलन  बनाए रखा जाता है. इससे शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलती है और पशु गंभीर हालत में जाने से बच जाता है. यही वजह है कि सर्दी के मौसम में यह थेरेपी और भी ज्यादा अहम हो जाती है.

दुधारू पशुओं के लिए क्यों है वरदान

दुधारू पशुओं में कमजोरी का सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. अगर पशु कमजोर है या बीमार है, तो दूध कम हो जाता है या पूरी तरह बंद भी हो सकता है. फ्रूट थेरेपी से पशु को तुरंत ऊर्जा मिलती है, जिससे उसकी सेहत सुधरती है और धीरे-धीरे दूध उत्पादन भी सामान्य होने लगता है. यही कारण है कि पशुपालकों के लिए यह थेरेपी किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जाती. समय पर सही इलाज  मिलने से न सिर्फ पशु की जान बचती है, बल्कि पशुपालक को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकता है.

फ्रूट थेरेपी कोई अजब-गजब प्रयोग नहीं, बल्कि पशु चिकित्सा का एक जरूरी और कारगर तरीका है. अगर पशुपालक समय रहते इसके बारे में जानकारी रखें और जरूरत पड़ने पर सही इलाज कराएं, तो कई पशुओं को गंभीर हालत में जाने से बचाया जा सकता है. यह जानकारी हर पशुपालक के लिए बेहद काम की है, ताकि उनके पशु स्वस्थ  रहें और आमदनी पर भी असर न पड़े.

Published: 2 Jan, 2026 | 06:01 PM

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