कम लागत में शुरू करें देसी अंडे का बिजनेस, गांव में रहकर हर महीने होगी अच्छी कमाई!

Desi Egg Business : कम लागत और कम जोखिम वाला देसी अंडे का व्यवसाय गांव के लोगों के लिए कमाई का भरोसेमंद जरिया बन रहा है. बाजार में बढ़ती मांग और आसान बिक्री व्यवस्था के कारण यह काम तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सही देखभाल और योजना से यह व्यवसाय लंबे समय तक नियमित आमदनी दे सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 30 Dec, 2025 | 12:34 PM

Desi Egg Business : अगर आप गांव में रहकर ऐसा काम शुरू करना चाहते हैं, जिसमें लागत कम हो, मेहनत ज्यादा न लगे और कमाई लगातार होती रहे, तो देसी अंडे का बिजनेस आपके लिए शानदार मौका बन सकता है. आज के समय में लोग सेहत को लेकर ज्यादा सजग हो गए हैं और देसी अंडे को पोषण से भरपूर मानते हैं. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. खास बात यह है कि देसी अंडे बेचने के लिए आपको दूर बाजार जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती, व्यापारी खुद फार्म तक पहुंच जाते हैं. देसी अंडा उत्पादन अब सिर्फ परंपरागत काम नहीं रहा, बल्कि यह एक फायदे का व्यवसाय बन चुका है. सही योजना और थोड़ी समझदारी से यह काम गांव के युवाओं और किसानों की आमदनी का मजबूत जरिया बन सकता है.

कम लागत में शुरू, मुनाफा भरपूर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देसी अंडे  का बिजनेस ज्यादा पैसे मांगता नहीं है. शुरुआत में मुर्गी शेड, चूजे और दाने पर खर्च आता है. आमतौर पर 150 से 200 मुर्गियों से भी इस काम की अच्छी शुरुआत हो सकती है. देसी मुर्गियों की खास बात यह है कि ये कम बीमार पड़ती हैं और खुले माहौल में आसानी से पाली जा सकती हैं. एक देसी मुर्गी साल भर में औसतन 160 से 165 अंडे देती है. बाजार में एक देसी अंडा करीब 10 से 12 रुपये तक बिक जाता है. ऐसे में कम संख्या में मुर्गियां  होने के बावजूद अच्छी आमदनी निकल आती है.

कब शुरू होती है कमाई

देसी मुर्गी तुरंत अंडा नहीं देती. जब चूजा खरीदा जाता है, तो उसे करीब 7 महीने तक पालना पड़ता है. आठवें महीने से मुर्गी अंडा देना शुरू करती है. इस दौरान मुर्गी को जितनी अच्छी खुराक दी जाती है, उतना ही अंडा उत्पादन  बेहतर होता है. यही वजह है कि संतुलित दाना और साफ-सफाई पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. एक बार अंडा आना शुरू हो जाए, तो रोजाना कमाई का रास्ता खुल जाता है.

अंडों की जबरदस्त मांग

देसी अंडों की मांग इतनी ज्यादा होती है कि कई बार सप्लाई कम पड़ जाती है. लोग इन्हें ताकत बढ़ाने और बच्चों व बुजुर्गों के लिए ज्यादा फायदेमंद मानते हैं. अच्छी बात यह है कि अंडों को बेचने के लिए किसी बड़े बाजार या दुकान  की जरूरत नहीं होती. स्थानीय व्यापारी और ग्राहक खुद फार्म से अंडे ले जाते हैं. इससे परिवहन का खर्च भी बच जाता है.

सालाना लाखों की कमाई का मौका

अगर कोई व्यक्ति 200 देसी मुर्गियों  से यह बिजनेस शुरू करता है, तो सही देखभाल के साथ सालाना करीब 3 से 4 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है. एक साल बाद जब मुर्गी की अंडा देने की क्षमता कम हो जाती है, तो उसे बेच दिया जाता है. उसी दौरान अंडों से नए चूजे तैयार कर अगला चक्र शुरू किया जा सकता है. इस तरह यह बिजनेस लगातार चलता रहता है. सरकार भी देसी मुर्गी पालन  को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं के जरिए सहयोग कर रही है. कम मेहनत, कम लागत और लगातार आमदनी-अगर आप यही चाहते हैं, तो देसी अंडे का बिजनेस आपके लिए एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकता है.

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