चना-सरसों किसानों के लिए मुसीबत बने ये 4 कीट, फसल को नुकसान से बचाने ये दवाएं डालें.. एडवाइजरी जारी

कृषि उपनिदेशक डॉने किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों को बचाने के लिए रसायनों का उचित छिड़काव करें. उन्होंने चने की फसल के लिए कुछ दवाएं भी बताई हैं, जिन्हें इस्तेमाल कर किसान अपनी फसल को नुकसान से बचा सकते हैं.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 8 Feb, 2026 | 07:39 PM

रबी सीजन की प्रमुख दलहन तिलहन फसलों पर कीटों के प्रकोप को लेकर चेतावनी जारी की गई है. कृषि एडवाइजरी में किसानों को फली छेदक, माहू, पेंटेड बग, आरा मक्खी और मोयला कीट से फसल को बचाने की सलाह दी गई है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल में छिड़काव के लिए दवाओं का सुझाव भी दिया है. बदलते मौसम के चलते कीटों और रोगों का खतरा फसलों में बढ़ा है. किसानों को अगले 15 दिनों तक फसल की लगातार देखरेख करने की सलाह दी गई है.

मैदानी इलाकों में बदलते मौसम से फसलों में कीटों की समस्या बढ़ी

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत मैदानी राज्यों की रबी फसलों में रोग और कीट से बचाव के लिए किसानों को अलर्ट किया गया है. मध्य प्रदेश के पाली जिले के कई हिस्सों में कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है. पाली जिले के बाली, साण्डेराव और जवाई बांध सहित कई क्षेत्रों में रबी की फसलों में कीट और रोगों की पुष्टि कृषि विभाग के अधिकारियों ने की है. कृषि विभाग की विशेष जांच टीम के दौरे के बाद सरसों, गेहूं, चना, अरंडी और मसालों की फसलों में खराबी सामने आई है.

मोयला कीट से बचाव के लिए ये दवा छिड़काएं

पाली जिले के कृषि उपनिदेशक डॉ. खुमान सिंह ने प्रभावित इलाकों के किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों को बचाने के लिए रसायनों का उचित छिड़काव करें. उन्होंने चने की फसल के लिए इमामेक्टीन बेंजोइट और गेहूं के लिए टेबुकोनाजोल के उपयोग के निर्देश दिए हैं. सरसों में मोयला कीट की समस्या को देखते हुए उन्होंने पकती फसल पर छिड़काव न करने को कहा है, जबकि तारामीरा के लिए इमिडाक्लोपिड दवा के प्रयोग का सुझाव दिया है।

सरसों फसल को पेंटेड बग और आरा मक्खी से बचाना जरूरी

मध्य प्रदेश के अलावा यूपी और बिहार में सरसों की फसल में प्रमुख रूप से माहू (एफिड), पेंटेड बग और आरा मक्खी नुकसान पहुंचा रही है. माहू के प्रकोप से बचाव के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप लगाएं और शुरूआती अवस्था में नीम तेल या नीम आधारित दवाओं का छिड़काव करें. खेत में मित्र कीटों जैसे लेडीबर्ड बीटल को संरक्षण देना भी उपयोगी होता है. यदि कीटों का प्रकोप आर्थिक स्तर से ऊपर हो जाए तो डायमेथोएट या थायोमेथोक्साम का छिड़काव कृषि विभाग की सिफारिश के अनुसार करें. समय पर सिंचाई, निराई–गुड़ाई और संतुलित खाद का प्रयोग करने से भी सरसों की फसल को कीट प्रकोप से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

चना फसल को कई कीटों से नुकसान का खतरा बढ़ा

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के प्रशिक्षण एवं प्रसार ब्यूरो के अनुसार बदलते मौसम के चलते रबी फसलों में कीटों का हमला बढ़ा है. चना की फसल में मुख्य रूप से फली छेदक (हेलिकोवर्पा), कटवर्म और एफिड (माहू) का प्रकोप देखा जा रहा है. इससे बचाव के लिए किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना चाहिए. कृषि सलाह में कहा गया है कि शुरुआती अवस्था में फेरोमोन ट्रैप (5–6 प्रति एकड़) लगाकर कीटों की निगरानी करें. जैविक नियंत्रण के लिए नीम आधारित कीटनाशक (नीम तेल 1500 पीपीएम या एनएसके 5%) का छिड़काव लाभकारी होता है. अधिक प्रकोप की स्थिति में कृषि विशेषज्ञ की सलाह से इमामेक्टिन बेंजोएट या स्पिनोसैड का सीमित और संतुलित उपयोग करें. संतुलित उर्वरक प्रबंधन रखें और अधिक नाइट्रोजन से बचें, क्योंकि इससे कीट बढ़ते हैं.

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Published: 8 Feb, 2026 | 07:37 PM

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