मंडियों में मूंग की बंपर आवक, 8200 रुपये क्विंटल भाव.. क्या फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा

पंजाब के फरीदकोट स्थित कोटकपूरा अनाज मंडी में इस बार मूंग की रिकॉर्ड आवक हो रही है. मूंग 8,100 से 8,200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है. स्थानीय दाल मिलों और बाहरी खरीदारों की मजबूत मांग ने बाजार को सहारा दिया है. विशेषज्ञ इसे फसल विविधीकरण के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 4 Jul, 2026 | 01:40 PM

Moong Farming: पंजाब में मूंग की खेती करने वाले किसानों को पिछले साल के मुकाबले इस बार अच्छे दाम मिल रहे हैं. फरीदकोट की कोटकपूरा अनाज मंडी में मूंग की रिकॉर्ड आवक दर्ज की जा रही है. अब तक मंडी में 4,500 से 5,000 बैग मूंग पहुंच चुकी है. शुक्रवार को मूंग का भाव 8,100 से 8,200 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है. अच्छे बाजार भाव और मजबूत मांग के कारण किसानों को बेहतर मुनाफा मिल रहा है. हालांकि, यह कीमत अभी भी मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,768 रुपये प्रति क्विंटल से कम है.

व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा रुझान को देखते हुए इस सीजन में मूंग की आवक पिछले साल का रिकॉर्ड पार कर सकती है. हालांकि, सीजन की शुरुआत में हुई बेमौसम बारिश से मूंग की गुणवत्ता पर थोड़ा असर पड़ा और दाने कुछ हल्के रह गए. इसके बावजूद बाजार में मूंग की मांग मजबूत  बनी हुई है. स्थानीय दाल मिलें और व्यापारी लगातार खरीदारी कर रहे हैं, जिससे मंडी में कारोबार तेज बना हुआ है.

किसानों को और बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद

कोटकपूरा के आढ़ती संजय मित्तल ने द ट्रिब्यून से कहा कि भले ही सरकारी एजेंसियां मूंग की सक्रिय खरीद नहीं करती हैं, लेकिन स्थानीय दाल मिलों और राज्य के बाहर के खरीदारों की मजबूत मांग के कारण किसानों को फसल के अच्छे दाम मिल रहे हैं. इससे मूंग की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है. व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल भी सीजन आगे बढ़ने के साथ मूंग के भाव 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए थे. यदि इस बार भी यही रुझान जारी रहता है, तो आने वाले हफ्तों में किसानों को और बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है.

पंजाब में फसल विविधीकरण को बढ़ावा

अच्छे उत्पादन और मजबूत बाजार भाव के इस संयोजन को पंजाब में फसल विविधीकरण  के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे किसानों का रुझान गेहूं-धान के पारंपरिक चक्र से हटकर दूसरी फसलों की ओर बढ़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मूंग जैसी दलहनी फसलों को धान की तुलना में काफी कम पानी की जरूरत होती है. साथ ही यह फसल मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता में भी सुधार करती है. मूंग का फसल चक्र भी छोटा होता है, जिससे किसानों को कम समय में उत्पादन और आय मिल जाती है.

मूंग की खेती के लिए किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मिल रहे अच्छे दाम आने वाले सीजन में किसानों को अधिक क्षेत्र में मूंग की खेती के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. मंडी में इस समय 60 दिन में तैयार होने वाली जल्दी पकने वाली ‘साथी’ किस्म और सामान्य मूंग, दोनों की आवक हो रही है. हालांकि साथी किस्म का भाव सामान्य मूंग की तुलना में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल कम है, फिर भी दोनों किस्मों से किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है.

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