कच्चे जूट की ऊंची कीमतों से परेशानी पर केंद्र ने बढ़ाई सख्ती, स्टॉक लिमिट तय की और जूट बैग का दाम बढ़ाया

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कच्चे जूट की उपलब्धता की समीक्षा की और मौजूदा सीजन में सप्लाई की कमी के बीच इंडस्ट्री और किसानों को सपोर्ट देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है. केंद्रीय मंत्री ने अनाज की पैकेजिंग के लिए कच्चे जूट की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 21 Jan, 2026 | 01:46 PM

कच्चे जूट की उपलब्धता में कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए अभियान शुरू किया है. इसके साथ ही व्यापारियों के लिए जूट स्टॉक करने की लिमिट भी तय कर दी है. अधिक स्टॉक मिलने की स्थिति में 10 दिनों के अंदर उसे बाजार में सप्लाई करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए जूट बैग की कीमत को भी बढ़ाया है. अब जनवरी 2026 में दाम बढ़ाकर 87.20 रुपये प्रति बैग कर दिया गया है. हालांकि, सरकार के इन उपायों पर जूट बेलर्स एसोसिएसन ने नाराजगी जताते हुए मौजूदा जूट फसल का फिर से मूल्यांकन करने की मांग की है.

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कच्चे जूट की उपलब्धता की समीक्षा की और मौजूदा सीजन में सप्लाई की कमी के बीच इंडस्ट्री और किसानों को सपोर्ट देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है. पीटीआई के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने मौजूदा बाजार की स्थितियों का आकलन किया और पर्यावरण के अनुकूल अनाज की पैकेजिंग के लिए कच्चे जूट की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए.

कच्चे जूट का भाव 13 हजार रुपये पहुंचा

अधिकारियों ने कहा कि जूट कीमतों में लगभग 13,000 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी से बढ़ोतरी के बीच जूट कमिश्नर ने व्यापारियों और मिलों के लिए कच्चे जूट के स्टॉक रखने के नियमों को तुरंत प्रभाव से सख्त कर दिया है. उन्होंने कहा कि यह कदम दिसंबर 2025 में जारी किए गए पिछले आदेश में आंशिक रूप से बदलाव करता है और इसका मकसद जमाखोरी को रोकना और बाजार को स्थिर करना है.

1200 क्विंटल से ज्यादा जूट का स्टॉक नहीं कर सकेंगे व्यापारी

संशोधित नियमों के तहत रजिस्टर्ड बेलर अब अधिकतम 1200 क्विंटल कच्चा जूट रख सकते हैं. जबकि, अन्य रजिस्टर्ड स्टॉक रखने वालों के लिए यह सीमा 25 क्विंटल तय की गई है. बिना रजिस्टर्ड व्यापारियों को पांच क्विंटल से ज्यादा कच्चा जूट रखने पर रोक लगा दी गई है. बयान में कहा गया है कि जूट मिलों को मौजूदा उत्पादन स्तरों के आधार पर गणना के अनुसार केवल 45 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है. जूट कमिश्नर अमृत राज ने संशोधित सीमा से ज्यादा स्टॉक रखने वाली सभी संस्थाओं को आदेश के 10 दिनों के भीतर अतिरिक्त स्टॉक को खत्म करने का निर्देश दिया है.

जूट बैग की कीमतों को बढ़ाकर 87.20 रुपये प्रति बैग किया

कच्चे जूट की ऊंची कीमतों के असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने B-ट्विल जूट बैग की कीमतें सितंबर 2024 में 58-60 रुपये प्रति बैग से बढ़ाकर सितंबर 2025 में 74 रुपये की थीं. अब इस कीमत को जनवरी 2026 में बढ़ाकर 87.20 रुपये प्रति बैग किया गया है. इस फैसले से जूट किसानों और मजदूरों को लाभ पहुंचेगा और उन्हें सही कीमत के साथ समय पर मजदूरी भुगतान होना पक्का होगा. बता दें कि 80 फीसदी जूट किसान और मजदूर पश्चिम बंगाल में रहते हैं.

जूट स्टॉक पर केंद्र के फैसले पर जूट एसोसिशन को आपत्ति

जूट बेलर्स एसोसिएशन (JBA) ने नियमों को सख्त करने पर आपत्ति जताई और कच्चे जूट की उपलब्धता के बारे में कही जा रही बातों को गुमराह करने वाला बताया है. कपड़ा मंत्रालय को लिखे एक पत्र में एसोसिएशन ने कहा कि बेलर्स को पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री मोलोय घटक की अध्यक्षता में हुई हालिया त्रिपक्षीय बातचीत से बाहर रखा गया था, जिसके दौरान कुछ हितधारकों ने कच्चे जूट में निजी व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का भी सुझाव दिया था, जिस पर JBA ने चेतावनी दी कि इससे वैल्यू चेन में सभी की आजीविका बाधित हो सकती है.

गंभीर कमी के दावों पर सवाल उठाते हुए JBA ने कहा कि जुलाई और दिसंबर 2025 के बीच कच्चे जूट की आवक पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 30 फीसदी अधिक थी. एसोसिएशन ने फसल की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन करने की मांग की है.

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