सरकार का मास्टर प्लान! सोलर पंप, डेयरी और नए नियमों से किसानों की आय बढ़ाने का नया प्लान

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देते हुए गेहूं खरीदी के नियमों में बदलाव किया है. अब 50 फीसदी तक कम चमक वाला गेहूं भी खरीदा जाएगा. इसके साथ दानों की गुणवत्ता सीमा में भी छूट दी गई है. सरकार का उद्देश्य किसानों को नुकसान से बचाना और उनकी आय को सुरक्षित बनाना है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 27 Apr, 2026 | 04:47 PM

Wheat Procurement: CM मोहन यादव ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं खरीद नियमों में अहम बदलाव किया है. अब 50 फीसदी तक कम चमक वाला गेहूं भी सरकार खरीदेगी. यह फैसला उन किसानों के लिए राहत भरा है, जिनकी फसल मौसम या पानी की कमी के कारण प्रभावित हुई थी. राज्य सरकार का मकसद साफ है कि किसानों को नुकसान से बचाना और उनकी आय को स्थिर रखना. इसके साथ ही उन्होंने कृषि कल्याण के लिए कई और फैसले लिए जिससे किसानों की आय बेहतर हो सके.

गेहूं खरीदी के नियमों में बड़ा बदलाव

मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं उपार्जन  के नियमों में ढील देकर किसानों के हित में बड़ा कदम उठाया है. अब तक कम चमक या हल्की गुणवत्ता वाले गेहूं को खरीद में दिक्कत होती थी, लेकिन नए फैसले के तहत 50 फीसदी तक चमक विहीन गेहूं भी खरीदा जाएगा. इसके अलावा, कम विकसित दानों की सीमा 6 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दी गई है. इसी तरह क्षतिग्रस्त दानों की सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है. इस बदलाव का सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा, जिनकी फसल सूखा, अधिक तापमान या सिंचाई की कमी से प्रभावित हुई है. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी और उन्हें बाजार में कम कीमत मिलने का जोखिम भी घटेगा.

मुआवजा और बोनस से बढ़ेगी किसानों की आय

सरकार ने सिर्फ गेहूं खरीदी  में ही राहत नहीं दी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई और बड़े फैसले भी किए हैं. हाल ही में राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को 4 गुना तक मुआवजा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है. इसके साथ ही दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए उड़द पर विशेष बोनस देने की घोषणा की गई है. समर्थन मूल्य के अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस किसानों को मिलेगा. इससे किसानों का रुझान दलहन और तिलहन की खेती की ओर बढ़ेगा और उनकी आमदनी में इजाफा होगा.

सस्ती बिजली और सोलर पंप से आत्मनिर्भर किसान

मध्यप्रदेश सरकार ने 2026 को किसान कल्याण वर्ष  घोषित किया है. इस दौरान किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन देने की योजना लागू की गई है. इसके साथ ही कृषक मित्र योजना के तहत 90 फीसदी सब्सिडी पर सोलर पंप भी दिए जा रहे हैं. इस पहल का उद्देश्य किसानों को बिजली पर निर्भरता से मुक्त करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. सरकार की कोशिश है कि किसानों को रात के बजाय दिन में सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिले, जिससे खेती का काम आसान और सुरक्षित हो सके.

डेयरी सेक्टर से बढ़ेगी ग्रामीण आय

खेती के साथ-साथ डेयरी  को भी मजबूत बनाने पर सरकार का खास जोर है. राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने के लक्ष्य के साथ 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है. वर्तमान में प्रदेश में रोजाना 10 लाख किलोग्राम से ज्यादा दूध का संग्रह हो रहा है. इससे जुड़े किसानों को अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है. दूध के दाम में भी 8 से 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों की आय में सीधा फायदा पहुंच रहा है. इसके अलावा, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत डेयरी यूनिट लगाने पर 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं.

खाद और संसाधनों की आसान उपलब्धता

सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता  को भी बेहतर बनाया है. प्रदेश में यूरिया का पर्याप्त भंडारण किया गया है और नई तकनीक के जरिए वितरण प्रणाली को आसान बनाया गया है. अब किसानों को बिना लंबी लाइन में लगे, अपनी सुविधा के अनुसार खाद मिल सकेगी. ये कदम खेती की लागत कम करने और समय बचाने में मदद करेगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव के इन फैसलों से साफ है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. गेहूं खरीदी में राहत, बोनस योजनाएं, सोलर पंप और डेयरी विकास जैसे कदम किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आए हैं. आने वाले समय में ये योजनाएं न सिर्फ किसानों की जिंदगी आसान बनाएंगी, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगी.

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Published: 27 Apr, 2026 | 04:47 PM
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