Milk Procurement: हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन (मिल्कफेड) ने दूध खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए एक पशुपालक से प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध खरीदने की सीमा तय कर दी है. इस नए नियम का उद्देश्य राज्य में अधिक से अधिक छोटे और सीमांत पशुपालकों को सहकारी दुग्ध प्रणाली से जोड़ना और उन्हें सरकार द्वारा बढ़ाए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ दिलाना है. सरकार गाय और भैंस के दूध के खरीद मूल्य को भी बढ़ाकर भुगतान कर रही है. सरकार का मानना है कि इससे दूध उत्पादन से जुड़े ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और दुग्ध व्यवसाय को नया विस्तार मिलेगा.
छोटे पशुपालकों को मिलेगा अधिक लाभ
मिल्कफेड के अनुसार, अब तक कुछ बड़े उत्पादक ही बड़ी मात्रा में दूध बेचकर बढ़े हुए एमएसपी का अधिक लाभ प्राप्त कर रहे थे. नई व्यवस्था लागू होने के बाद दूध खरीद का दायरा बढ़ेगा और अधिक संख्या में छोटे पशुपालकों को सहकारी समितियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा. इस फैसले से ऐसे परिवारों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है जो सीमित संख्या में दुधारू पशु पालते हैं और नियमित आय के लिए दुग्ध व्यवसाय पर निर्भर हैं. सरकार का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन से जुड़े लाभों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है.
नए पशुपालकों के लिए खुलेंगे अवसर
नई खरीद सीमा लागू होने के बाद सहकारी दुग्ध समितियों में नए सदस्यों के शामिल होने की संभावना बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और पशुपालन को एक मजबूत आय स्रोत के रूप में विकसित किया जा सकेगा. सहकारी ढांचे में अधिक लोगों की भागीदारी बढ़ने से दूध संग्रहण नेटवर्क भी मजबूत होगा. साथ ही, छोटे स्तर पर पशुपालन करने वाले परिवारों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी.
दूध के एमएसपी में हुई ऐतिहासिक बढ़ोतरी
राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की है. गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं भैंस के दूध का एमएसपी 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी का उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर आय उपलब्ध कराना और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करना है. बढ़ी हुई कीमतों से किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिला है.
आंकड़ों में दिख रहा सरकारी पहल का असर
दूध पर बढ़े हुए MSP और सहकारी प्रणाली को मजबूत बनाने के प्रयासों का असर राज्य के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है. पिछले दो वर्षों में सहकारी दुग्ध प्रणाली से जुड़े दूध उत्पादकों की संख्या 28,645 से बढ़कर 42,500 तक पहुंच गई है. इसी अवधि में राज्य में प्रतिदिन दूध संग्रहण भी 1.57 लाख लीटर से बढ़कर 2.20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है. बढ़ते संग्रहण और उत्पादकों की संख्या यह संकेत देती है कि पशुपालक तेजी से सहकारी व्यवस्था की ओर आकर्षित हो रहे हैं और दुग्ध व्यवसाय राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.