Bihar Agriculture: बिहार में किसानों के लिए चलाया जा रहा फार्मर रजिस्ट्री अभियान अब तेजी पकड़ चुका है. कृषि विभाग के अनुसार इस अभियान का दूसरा चरण 12 मई से शुरू किया गया है. अब तक राज्य के 74,434 किसानों की सफल फार्मर रजिस्ट्री की जा चुकी है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह अभियान किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और समय पर पहुंचाने के लिए बेहद जरूरी है. कृषि मंत्री ने ये जानकारी ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल होने के लिए रवाना होने से पहले दी.
इस सम्मेलन में बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्रियों को आमंत्रित किया गया है. मंत्री ने अधिकारियों को अभियान में तेजी लाने के निर्देश भी दिए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार जून महीने तक राज्य के 86.36 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है. कृषि विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मिलकर इस अभियान को सफल बनाने में जुटे हैं.
पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री लागू होने के बाद कृषि योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लग सकेगी. उन्होंने बताया कि कई बार फर्जी दस्तावेजों और गलत रिकॉर्ड के कारण असली किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था. अब किसानों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से तैयार किया जा रहा है. इससे ये सुनिश्चित होगा कि सरकारी अनुदान और सहायता राशि सीधे सही किसान तक पहुंचे.
मंत्री ने कहा कि किसान की जमीन, पहचान और खेती से जुड़ी जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने से सरकारी कामकाज आसान होगा. उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि किसानों को किसी दफ्तर के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें समय पर लाभ मिल सके. इससे किसानों की परेशानियां भी कम होंगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी.
जमीन विवाद और मुकदमों में आएगी कमी
कृषि मंत्री ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री अभियान का सबसे बड़ा फायदा जमीन विवादों को कम करने में मिलेगा. बिहार में लंबे समय से जमीन संबंधी विवाद बड़ी समस्या रहे हैं. गलत रिकॉर्ड, अधूरे दस्तावेज और म्यूटेशन में देरी के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है. उन्होंने बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की मदद से भूमि रिकॉर्ड को अपडेट किया जा रहा है. परिमार्जन और म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फार्मर रजिस्ट्री का काम और तेज होगा.
मंत्री ने कहा कि जब जमीन से जुड़े रिकॉर्ड साफ और डिजिटल होंगे, तब विवादों और कोर्ट में चल रहे मुकदमों की संख्या भी कम होगी. इससे किसानों को राहत मिलेगी और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी. उन्होंने यह भी बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और कृषि विभाग पहले से मिलकर इस अभियान पर काम कर रहे हैं. दोनों विभागों के समन्वय से किसानों की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा रहा है.
केंद्र सरकार से मिलेगी बड़ी आर्थिक सहायता
कृषि विभाग के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री अभियान पूरा होने के बाद राज्य को केंद्र सरकार से बड़ी आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्नति योजना जैसी कई योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान दिया जाता है. मंत्री ने कहा कि यदि राज्य सरकार तय लक्ष्य के अनुसार किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी कर लेती है, तो बिहार को केंद्र सरकार से 1000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि मिल सकती है. ये राशि कृषि क्षेत्र के विकास, किसानों को तकनीकी सहायता और नई योजनाओं के संचालन में उपयोग की जाएगी.
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान को गांव स्तर तक प्रभावी तरीके से चलाया जाए. किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं और उन्हें रजिस्ट्री प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जाए.