अमेरिकी व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन.. CJP अध्यक्ष का दावा, कई किसान नजरबंद

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. जंतर-मंतर पर किसान संगठनों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है. इस बीच CJP अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि कई किसान नेताओं को नजरबंद किया गया है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 28 Jun, 2026 | 05:22 PM

India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. किसानों का कहना है कि यह समझौता अगर लागू होता है तो इससे भारतीय कृषि और किसानों की आजीविका पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया है. इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के अध्यक्ष अभिषेक दीपंकर ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कई किसान नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए उनके घरों में नजरबंद किया गया है.

किसान नेताओं को नजरबंद किए जाने का आरोप

सीजेपी (Cockroach Janta Party) अध्यक्ष अभिषेक दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर दावा किया कि यूपी, पंजाब और हरियाणा के कई किसान नेताओं  को प्रशासन द्वारा घरों में ही रोक दिया गया है. उनका कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि किसान नेता जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल न हो सकें. इस दावे के बाद राजनीतिक और किसान संगठनों में बहस तेज हो गई है. हालांकि प्रशासन की ओर से इस आरोप पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

गुरनाम सिंह चढूनी ने दिया नैतिक समर्थन

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए जो भी शांतिपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं, वे उनके साथ हैं. चढूनी ने यह भी कहा कि सरकार को किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और किसी भी ऐसे समझौते से बचना चाहिए जो कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकता हो.

व्यापार समझौते को लेकर किसानों की मुख्य आपत्तियां

किसानों का आरोप है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते  में कुछ ऐसी शर्तें शामिल हैं, जो भारतीय कृषि बाजार को प्रभावित कर सकती हैं. उनका कहना है कि इससे विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और घरेलू किसानों को नुकसान होगा. इसी कारण किसान इस समझौते को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. किसान संगठनों का दावा है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

जंतर-मंतर प्रदर्शन और आगे की रणनीति

किसान संगठनों  ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर दो दिन पहले बड़ा प्रदर्शन किया था. बड़ी संख्या में किसान इस प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार से समझौते को वापस लेने की मांग की. इसके बाद चंडीगढ़ में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई. अब तय किया गया है कि 1 जुलाई को चंडीगढ़ में फिर से एक अहम बैठक होगी, जिसमें आंदोलन के अगले चरण पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.

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Published: 28 Jun, 2026 | 03:22 PM

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