फल-सब्जियां और औषधीय पौधे उगाने के मिलेंगे पैसे, आयुष मंत्रालय देगा 7 लाख सब्सिडी

जनजातीय क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों के बेहतर पोषण और हरियाली बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल शुरू की है. योजना के तहत स्कूल परिसरों में फल, सब्जियां और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे. इसके लिए सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं से प्रस्ताव मांगे गए हैं और चयनित संस्थाओं को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 14 May, 2026 | 06:45 PM

Nutrition Garden: भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) ने जनजातीय क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए बड़ी पहल शुरू की है. बोर्ड ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS/NESTS) में पोषण वाटिका स्थापित करने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं. इस योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों को फल, सब्जियां और औषधीय पौधों के जरिए बेहतर पोषण उपलब्ध कराना है. इस परियोजना में चयनित संस्थाओं को तीन वर्षों के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी. योजना में पौधारोपण से लेकर सिंचाई, प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और रखरखाव तक सभी गतिविधियों को शामिल किया गया है. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है और इच्छुक संस्थाएं 1 जून 2026 तक आवेदन कर सकती हैं.

स्कूलों में पोषण और हरियाली बढ़ाने पर फोकस

इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों के बीच पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्राकृतिक एवं पौष्टिक खाद्य स्रोतों  से जोड़ना है. पोषण वाटिका के तहत स्कूल परिसरों में फलदार, सब्जी और औषधीय पौधों की खेती की जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे बच्चों को ताजा और पौष्टिक खाद्य सामग्री मिलेगी, साथ ही वे पौधों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी समझ पाएंगे. योजना के तहत स्कूलों में कम से कम 30 प्रकार की पौध प्रजातियां लगाना अनिवार्य होगा. इसके अलावा छात्रों और शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे पौधों की देखभाल, औषधीय उपयोग और पोषण संबंधी जानकारी हासिल कर सकें. स्कूल परिसरों में सूचना पट्ट (साइनेज) भी लगाए जाएंगे, जिससे बच्चों को विभिन्न पौधों की जानकारी आसानी से मिल सके.

100 वर्ग मीटर से 2 एकड़ तक बनाई जा सकेगी वाटिका

NMPB की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पोषण वाटिका  का क्षेत्रफल 100 वर्ग मीटर से लेकर 2 एकड़ तक हो सकता है. परियोजना में पौधारोपण, सिंचाई व्यवस्था, रखरखाव और जागरूकता गतिविधियों को शामिल किया गया है. योजना के तहत पहले वर्ष में बगीचे की स्थापना पर विशेष जोर रहेगा. इसके बाद अगले दो वर्षों तक रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी. सरकार का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि स्कूलों में एक स्थायी हरित वातावरण तैयार करना है. इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ प्रकृति और स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक बनाया जा सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से जनजातीय क्षेत्रों में पोषण सुधार के साथ-साथ औषधीय पौधों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा.

तीन साल में 7 लाख रुपये तक की सहायता

इस परियोजना के लिए सरकार ने कुल 7 लाख रुपये तक का अनुदान तय किया है. यह राशि तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी. पहले वर्ष में परियोजना की स्थापना के लिए 4 लाख 50 हजार रुपये दिए जाएंगे. इसमें पौधारोपण, सिंचाई, उपकरण और अन्य जरूरी कार्य शामिल होंगे. दूसरे और तीसरे वर्ष में रखरखाव और देखभाल के लिए 1 लाख 25 हजार रुपये प्रति वर्ष दिए जाएंगे. इस पूरी योजना में 100 फीसदी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, यानी चयनित संस्थाओं को अपनी ओर से धन लगाने की आवश्यकता नहीं होगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे अधिक से अधिक संस्थाएं इस पहल से जुड़ेंगी और जनजातीय स्कूलों में पोषण एवं स्वास्थ्य सुधार  की दिशा में काम करेंगी.

1 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन का मौका

इस योजना के लिए सरकारी संगठन, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और स्वैच्छिक संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं. हालांकि आवेदन करने वाली संस्था के पास इस क्षेत्र में प्रमाणित अनुभव और विशेषज्ञता होना जरूरी है. इच्छुक संस्थाएं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं. आवेदन प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों की पूरी जानकारी आयुष अनुदान पोर्टल पर उपलब्ध है. NMPB ने स्पष्ट किया है कि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 1 जून 2026 निर्धारित की गई है. ऐसे में इच्छुक संस्थाओं को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है.

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Published: 14 May, 2026 | 06:17 PM
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