FSSAI sweet potato alert: सर्दियों का मौसम आते ही बाजारों में शकरकंद की रौनक बढ़ जाती है. ठंड के दिनों में गरमागरम भुना हुआ या उबला हुआ शकरकंद न सिर्फ स्वाद में लाजवाब लगता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. बच्चे हों या बुजुर्ग, लगभग हर उम्र के लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाला हर शकरकंद सुरक्षित नहीं होता? बढ़ती मांग के चलते कुछ व्यापारी इसमें खतरनाक केमिकल की मिलावट कर रहे हैं, जो आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है.
क्यों खास है शकरकंद सेहत के लिए
शकरकंद को पोषण का पावरहाउस कहा जाता है. इसमें विटामिन A, विटामिन C, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. नियमित रूप से सही और शुद्ध शकरकंद खाने से आंखों की रोशनी बेहतर होती है, इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है और पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है. यही नहीं, यह दिल की सेहत को बेहतर रखने, ब्लड शुगर को संतुलित करने और वजन नियंत्रित करने में भी मददगार माना जाता है. लेकिन ये सभी फायदे तभी मिलते हैं, जब शकरकंद असली और बिना मिलावट वाला हो.
शकरकंद में क्यों हो रही है मिलावट
पिछले कुछ वर्षों में शकरकंद को आलू के हेल्दी विकल्प के तौर पर देखा जाने लगा है. इसकी लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ी है. इसी का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी शकरकंद को ज्यादा लाल और चमकदार दिखाने के लिए उसमें रासायनिक रंग मिलाने लगे हैं. इस केमिकल का नाम रोडामाइन बी बताया जाता है, जो खाने की चीजों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है.
यह रंग आमतौर पर कपड़ा, कागज और स्याही में इस्तेमाल होता है, लेकिन मुनाफे के लालच में इसे शकरकंद पर लगाया जाता है ताकि वह ज्यादा ताजा और आकर्षक दिखे.
सेहत के लिए कितना खतरनाक है रोडामाइन बी
विशेषज्ञों और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार रोडामाइन बी शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है. लंबे समय तक इसके सेवन से लीवर और किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है. कुछ शोध यह भी बताते हैं कि यह केमिकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है. यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं ने खाने-पीने की चीजों में इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा रखी है.
घर बैठे 5 सेकंड में कैसे करें शुद्धता की जांच
अच्छी बात यह है कि शकरकंद की मिलावट पहचानने के लिए आपको किसी लैब या महंगे टेस्ट की जरूरत नहीं है. यह जांच आप घर पर ही कुछ सेकंड में कर सकते हैं. इसके लिए बस रूई का एक छोटा सा फाहा लें और उसे पानी या खाने वाले तेल में हल्का सा भिगो लें. अब इस रूई से शकरकंद की बाहरी सतह को हल्के हाथ से रगड़ें.
अगर रूई का रंग नहीं बदलता है, तो समझिए कि शकरकंद सुरक्षित है. लेकिन अगर रूई लाल या बैंगनी रंग की हो जाए, तो यह साफ संकेत है कि उसमें रासायनिक रंग की मिलावट की गई है और ऐसे शकरकंद को खाने से बचना चाहिए.
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शकरकंद खाते समय किन बातों का रखें ध्यान
हमेशा कोशिश करें कि बहुत ज्यादा चमकदार और असामान्य रूप से लाल दिखने वाले शकरकंद न खरीदें. प्राकृतिक शकरकंद का रंग हल्का और सामान्य होता है. घर लाने के बाद उसे अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें और अगर संभव हो तो छिलका उतारकर पकाएं.
सही शकरकंद से ही मिलेगा पूरा फायदा
अगर शकरकंद शुद्ध हो, तो यह सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है. उबला हुआ शकरकंद कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है.