जब पूरा गांव उतरता है तालाब में, तमिलनाडु का सदियों पुराना मछली उत्सव बना आकर्षण का केंद्र

तमिलनाडु के एक गांव में सदियों पुराना पारंपरिक मछली उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गया. हजारों लोग तालाब में उतरकर इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बने. ये आयोजन सिर्फ मछली पकड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि खेती, संस्कृति और सामाजिक एकता का भी बड़ा प्रतीक माना जाता है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 May, 2026 | 06:18 PM

Tamil Nadu Festival: तमिलनाडु के मदुरै (Madurai) जिले में इन दिनों एक अनोखा और सदियों पुराना त्योहार लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. कल्लनधिरी गांव में हर साल आयोजित होने वाला पारंपरिक मत्स्य पालन उत्सव इस बार भी हजारों लोगों की मौजूदगी में धूमधाम से मनाया गया. मेलूर के आसपास के पांच गांवों से लोग इस खास मौके पर एकत्र हुए. ये त्योहार सिर्फ मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की संस्कृति, कृषि परंपरा और सामाजिक एकता का बड़ा प्रतीक माना जाता है.

गर्मी की शुरुआत के साथ शुरू होता है खास उत्सव

यह पारंपरिक उत्सव हर साल गर्मी की शुरुआत में आयोजित किया जाता है. गांव के लोग इसे अच्छी फसल, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य से जोड़कर देखते हैं. त्योहार का मुख्य केंद्र पेरियानागिनी कानमोई नदी के किनारे स्थित ग्राम मंदिर होता है. उत्सव से पहले गांव में खास तैयारियां शुरू हो जाती हैं. पोस्टर, घोषणाएं और पारंपरिक संदेशों के जरिए लोगों को इस आयोजन में शामिल होने के लिए बुलाया जाता है. त्योहार की पूर्व संध्या पर गांव के लोग मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं और अच्छी बारिश, बेहतर खेती और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. सबसे खास बात ये है कि इस आयोजन में हर जाति और समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ शामिल होते हैं. यही वजह है कि यह उत्सव सामाजिक एकता की मिसाल भी माना जाता है.

तालाब में उतरते ही शुरू हो जाता है रोमांच

उत्सव का सबसे रोमांचक हिस्सा तब शुरू होता है जब हजारों लोग तालाब में उतरकर मछलियां पकड़ते  हैं. गांव के किसान हर साल पेरियार नहर से आने वाले पानी के साथ तालाब में मछलियों के बच्चे छोड़ते हैं. इसके बाद जब गर्मियों में पानी का स्तर कम होने लगता है, तब यह पारंपरिक मछली पकड़ने का उत्सव आयोजित किया जाता है. स्थानीय भाषा में इसे कनमोई अझिथल कहा जाता है. इस दौरान लोग पारंपरिक तरीके से बड़ी मछलियां पकड़ते हैं. बाद में इन्हें पकाकर मंदिर में देवता को अर्पित किया जाता है. इसके बाद गांव में सामूहिक भोज और उत्सव का माहौल बन जाता है. ड्रोन से ली गई तस्वीरों में हजारों लोगों को तालाब में एक साथ उतरते देखा गया, जिसने इस आयोजन को और भी खास बना दिया. सोशल मीडिया पर भी इस त्योहार की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं.

खेती, परंपरा और प्रकृति का अनोखा मेल

यह उत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि खेती और प्रकृति  के बीच गहरे संबंध को भी दर्शाता है. गांव के लोग मानते हैं कि पानी, खेती और मछलियां उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. यही कारण है कि इस त्योहार को कृषि चक्र से जोड़कर देखा जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के पारंपरिक आयोजन ग्रामीण जीवन की असली पहचान होते हैं. इससे लोगों में आपसी जुड़ाव बढ़ता है और पुरानी परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंचती हैं.

तमिलनाडु में धार्मिक उत्सवों की खास पहचान

तमिलनाडु अपने पारंपरिक और धार्मिक आयोजनों  के लिए देशभर में मशहूर है. इसी महीने राज्य के रंगनाथस्वामी मंदिर में भी भव्य रथ उत्सव आयोजित किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. लेकिन कल्लनधिरी का ये मछली उत्सव इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इसमें धर्म, खेती, प्रकृति और सामाजिक एकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है. सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और विश्वास के साथ निभाई जा रही है, जो ग्रामीण संस्कृति की मजबूत जड़ों को दिखाती है.

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