संसद में वंदे मातरम् पर बोले PM मोदी- 150 साल की इसकी यात्रा के हर पल को किया याद

पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए, तब देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था. जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 8 Dec, 2025 | 01:29 PM

Parliament Winter Session: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकाली संसद सत्र के दौरान वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर कहा कि इस गीत ने आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की जयघोष ने देश के आजादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी. यह गीत त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था. इसलिए उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना इस सदन में हम सबका बहुत बड़ा सौभाग्य है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और हम सभी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए, तब देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था. जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और जब वंदे मातरम् का अत्यंत उत्तम पर्व होना चाहिए था, तब भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया था. पीएम ने कहा कि जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देशभक्ति  के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था. जिस वंदे मातरम् के गीत ने देश को आजादी की ऊर्जा दी थी, उसके 100 वर्ष पूरे होने पर हमारे इतिहास का एक काला कालखंड दुर्भाग्य से उजागर हो गया.

वंदे मातरम् ने 1947 में देश को आजादी दिलाई

पीएम मोदी ने कहा कि 150 वर्ष उस महान अध्याय और उस गौरव को पुनः स्थापित करने का अवसर हैं. मेरा मानना है कि देश और सदन, दोनों को इस अवसर को जाने नहीं देना चाहिए. पीएम ने कहा कि यही वंदे मातरम् है, जिसने 1947 में देश को आजादी दिलाई. आज जब मैं वंदे मातरम् 150 निमित्त चर्चा आरंभ करने के लिए खड़ा हुआ हूं, यहां कोई पक्षप्रतिपक्ष नहीं है. क्योंकि हम सब जो यहां बैठे हैं, हमारे लिए यह ऋण स्वीकार करने का अवसर है, वह ऋण, जिसे निभाते हुए लाखों लोगों ने वंदे मातरम् के मंत्र के साथ आजादी का आंदोलन चलाया, और उसी का परिणाम है कि आज हम सब यहां बैठे हैं. इसलिए हम सभी सांसदों के लिए वंदे मातरम् का यह ऋण स्वीकार करने का अवसर है.

मां भारती को उन बेड़ियों से मुक्त कराने की एक पवित्र जंग थी

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम्, सिर्फ राजनीतिक लड़ाई  का मंत्र नहीं था. सिर्फ अंग्रेज जाएं और हम अपनी राह पर खड़े हो जाएं, वंदे मातरम् सिर्फ यहां तक सीमित नहीं था. आजादी की लड़ाई, इस मातृभूमि को मुक्त कराने की जंग थी. मां भारती को उन बेड़ियों से मुक्त कराने की एक पवित्र जंग थी. पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् का जो जनजन से जुड़ाव था, वह हमारे स्वतंत्रता संग्राम की एक लंबी गाथा की अभिव्यक्ति बन जाता है. जब भी किसी नदी की चर्चा होती है, तो उस नदी के साथ एक सांस्कृतिक धारा-प्रवाह, एक विकास-यात्रा की धारा-प्रवाह, एक जनजीवन की धारा-प्रवाह स्वतः जुड़ जाती है. लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि आजादी की जंग की पूरी यात्रा वंदे मातरम् की भावनाओं से होकर गुजरती थी? ऐसा भाव-काव्य शायद दुनिया में कहीं उपलब्ध नहीं होगा.

अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया, तो वंदे मातरम् चट्टान की तरह खड़ा रहा. यह नारा गली- गली का स्वर बन गया. अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन के माध्यम से भारत को कमजोर करने की दिशा पकड़ ली थी, लेकिन वंदे मातरम् अंग्रेजों के लिए चुनौती और देश के लिए शक्ति की चट्टान बनता गया. बंगाल की एकता के लिए वंदे मातरम् गलीगली का नारा बन गया था, और यही नारा बंगाल को प्रेरणा देता था. पीएम ने कहा कि अंग्रेज समझ चुके थे कि 1857 के बाद भारत में लंबे समय तक टिक पाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है.

जिस प्रकार के सपने लेकर वे आए थे, उन्हें यह साफ दिखने लगा कि जब तक भारत को बांटा नहीं जाएगा, लोगों को आपस में लड़ाया नहीं जाएगा, तब तक यहां राज करना कठिन है. तब अंग्रेज़ों ने ‘बांटो और राज करो’ का रास्ता चुना, और उन्होंने बंगाल को इसकी प्रयोगशाला बनाया.

 

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Published: 8 Dec, 2025 | 01:02 PM

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