इथेनॉल फैक्ट्री विवाद मामले पर किसानों की महापंचायत, इंटरनेट सेवाएं बंद.. धारा 163 लागू

Rajasthan Farmers Protest: इससे पहले 10 दिसंबर को टिब्बी में इथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ हुई महा पंचायत के दौरान फैक्ट्री में तोड़फोड़, आगजनी व हिंसा की घटना सामने आई थी. इसको देखते हुए प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 7 Jan, 2026 | 02:16 PM

राजस्थान के हनुमानगढ़ में इथेनॉल फैक्ट्री के विरोध ने अब तूल पकड़ लिया है. आज किसानों की महापंचायत की जा रही है. बीते एक साल से किसानों का विरोध चल रहा है, जो अब तीव्र रुख ले चुका है. मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और धारा 163 लागू कर दी गई है. बता दें कि इससे पहले 10 दिसंबर को टिब्बी में इथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ हुई महा पंचायत के दौरान फैक्ट्री में तोड़फोड़, आगजनी व हिंसा की घटना सामने आई थी.

किसानों की मांग – लिखित आश्वासन दे प्रशासन

हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी के राठी खेड़ा में इथेनॉल फैक्ट्री लगाने का विरोध किसान कर रहे हैं. बीते एक साल से चल रहे विरोध के बाद अब इसने उग्र रूप ले लिया है. विवाद मामले को लेकर बुधवार आज संगरिया की धानमंडी में किसान महापंचायत हो रही है. महा पंचायत में सैकड़ों की संख्या में भीड़ जुटी है. किसानों ने आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. किसान प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े हुए हैं.

प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं बंद कीं, भारी फोर्स तैनात

प्रशासन ने एहतियातन संगरिया कस्बे सहित आसपास के दस किमी एरिया में इंटरनेट सेवाएं बंद की गई है. संघर्ष समिति राठी खेड़ा में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्री का एमओयू रद्द करने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस करने की मांग कर रहे हैं. महापंचायत में सन 1970 में किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी गई है. महा पंचायत को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड़ पर है तथा भारी पुलिस तैनात किया गया है.

10 दिसंबर को तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी

इससे पहले 10 दिसंबर को टिब्बी में इथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ हुई महा पंचायत के दौरान फैक्ट्री में तोड़फोड़, आगजनी व हिंसा की घटना सामने आई थी. इसको देखते हुए प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अशांति या खतरे की आशंका होने पर लगाई जाती है, जिसके तहत 4 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस, हथियार रखने और बिना अनुमति के सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती है.

फैक्ट्री लगाने के विरोध में क्यों हैं किसान

किसानों ने कहा कि फैक्ट्री के लिए किया गया एमओयू रद्द हो और आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लिया जाए. किसानों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में एथेनॉल फैक्ट्री स्थापित होती है तो पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ेगा, कृषि भूमि बंजर हो जाएगी और सिंचाई के पानी का अत्यधिक दोहन होगा.

पूर्व विधायक बलवान पूनिया ने महापंचायत से पहले कई गांवों में जनसंपर्क किया. उन्होंने प्रशासन पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ यह कहा जा रहा है कि इस क्षेत्र में एथेनॉल फैक्ट्री नहीं लगेगी, लेकिन दूसरी ओर इसका कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया जा रहा. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान किसी भी कीमत पर गुमराह नहीं होंगे और अपना आंदोलन जारी रखेंगे.

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