पेप्सिको की जीत या किसानों की? FL 2027 आलू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दी पूरी तस्वीर

PepsiCo FL 2027 Potato: सुप्रीम कोर्ट ने पेप्सिको की FL 2027 आलू किस्म का रजिस्ट्रेशन बरकरार रखते हुए कंपनी को राहत दी है. साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि किसान कानून के तहत इस संरक्षित किस्म से मिले बीज को बचा, दोबारा बो और आपस में बेच सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 12 Aug, 2026 | 02:29 PM

Supreme Court FL 2027 Case: सुप्रीम कोर्ट ने पेप्सिको की FL 2027 आलू किस्म से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर अहम फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें FL 2027 आलू की किस्म पर पेप्सिको का रजिस्ट्रेशन बरकरार रखा गया था. इससे कंपनी को राहत मिली है. हालांकि, इस फैसले के साथ कोर्ट ने किसानों के अधिकारों को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है. कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत किसानों को संरक्षित फसल की किस्म से मिले बीज और उपज को बचाने, दोबारा बोने और आपस में बेचने का अधिकार है. यानी कंपनी का रजिस्ट्रेशन कायम रहने के बावजूद किसानों के कानूनी अधिकार खत्म नहीं होते हैं.

FL 2027 आलू पर पेप्सिको का दावा क्या है?

FL 2027 आलू की एक खास किस्म है, जिसका इस्तेमाल पेप्सिको के आलू आधारित उत्पादों में किया जाता है. कंपनी ने पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 (PPVFR Act) के तहत इस किस्म का रजिस्ट्रेशन कराया था. पेप्सिको का कहना था कि इस रजिस्ट्रेशन के आधार पर उसे इस किस्म पर ब्रीडर के अधिकार हासिल हैं और उसकी अनुमति के बिना इसका व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसी मुद्दे को लेकर कंपनी और किसान अधिकारों के समर्थकों के बीच विवाद खड़ा हुआ था.

किसान अधिकार कार्यकर्ता ने दी थी चुनौती

FL 2027 के रजिस्ट्रेशन को किसान अधिकार कार्यकर्ता कविता कुरुगंती ने चुनौती दी थी. उनकी ओर से पेप्सिको के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की मांग की गई थी. यह मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया था, जब पेप्सिको ने गुजरात के कुछ किसानों के खिलाफ FL 2027 आलू की कथित अनधिकृत खेती को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी. इसके बाद किसानों के अधिकार और कंपनियों के ब्रीडर अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने पेप्सिको को दी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. इसका मतलब है कि FL 2027 आलू की किस्म का पेप्सिको के पक्ष में रजिस्ट्रेशन फिलहाल बरकरार रहेगा. कंपनी के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि इससे संरक्षित किस्म पर उसके रजिस्ट्रेशन की कानूनी स्थिति बनी रहती है. लेकिन फैसले का दूसरा पहलू किसानों के लिए भी अहम है.

किसान बीज बचा और दोबारा बो सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने PPVFR Act की धारा 39(1)(iv) के तहत किसानों के अधिकारों को स्पष्ट किया. कोर्ट के मुताबिक, किसान संरक्षित किस्म से हासिल बीज या उपज को बचा सकते हैं, अगली फसल के लिए दोबारा बो सकते हैं और आपस में बेच भी सकते हैं. इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ किसी फसल की किस्म के रजिस्ट्रेशन के कारण किसानों के वे अधिकार खत्म नहीं हो जाते, जो कानून उन्हें देता है. हालांकि, किसानों के लिए एक सीमा भी है. वे इन बीजों को पेप्सिको के ब्रांडेड बीज के तौर पर बेच नहीं सकते.

पेप्सिको ने भी माना किसानों का अधिकार

सुनवाई के दौरान पेप्सिको ने अदालत के सामने कहा कि, वह कानून के तहत किसानों को दिए गए इन अधिकारों में दखल नहीं देगा. यानी कंपनी का रजिस्ट्रेशन अपनी जगह रहेगा, लेकिन किसान कानून में दिए गए अधिकारों के तहत बीज बचाने, दोबारा बोने और आपस में बेचने की गतिविधियां कर सकते हैं.

कंपनी और किसानों दोनों की स्थिति साफ

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से FL 2027 विवाद में दो अहम बातें सामने आई हैं. पहली, पेप्सिको का FL 2027 आलू किस्म पर रजिस्ट्रेशन बरकरार रहेगा. दूसरी, किसानों को PPVFR Act के तहत मिले अधिकार भी जारी रहेंगे. ऐसे में फैसला एक तरफ पौध किस्म विकसित करने वाली कंपनियों के अधिकारों को बनाए रखता है, तो दूसरी तरफ किसानों को कानून के तहत मिले बीज संबंधी अधिकारों को भी स्पष्ट करता है. इससे भविष्य में ऐसी संरक्षित फसल किस्मों को लेकर किसानों और कंपनियों के बीच होने वाले विवादों में कानूनी स्थिति समझने में मदद मिल सकती है.

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