खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना धीमी, 5 साल में लक्ष्य का सिर्फ 42 फीसदी हासिल.. 273302 हेक्टेयर में हुई खेती

देश में खाद्य तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू की गई पाम ऑयल योजना का लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हुआ है. NMEO-OP के तहत 2021-22 से 2025-26 के बीच 2.73 लाख हेक्टेयर में खेती लाई गई, जबकि लक्ष्य 6.50 लाख हेक्टेयर था. सरकार के मुताबिक, 15 राज्यों में 21.7 लाख हेक्टेयर संभावित क्षेत्र की पहचान हुई है, लेकिन सिर्फ 29 फीसदी में खेती हो रही है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 12 Aug, 2026 | 02:33 PM

खाद्य तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की सरकार की योजना अब तक रफ्तार नहीं पकड़ पाई है. केंद्र ने 2021-22 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम ऑयल (NMEO-OP) शुरू किया था, लेकिन मिशन के तहत अब तक सिर्फ 2,73,302 हेक्टेयर में पाम ऑयल की खेती हो पाई है. यह तय लक्ष्य का करीब 42 फीसदी ही है. हालांकि, सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक 6.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती का है. यानी लक्ष्य से 3,76,698 हेक्टेयर क्षेत्र पीछे रह गया. फिलहाल यह मिशन देश के 15 राज्यों में लागू किया जा रहा है.

राज्यों में तेलंगाना सबसे आगे रहा. यहां मिशन के तहत 98,112 हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती  लाई गई. इसके बाद आंध्र प्रदेश में 97,871 हेक्टेयर, अरुणाचल प्रदेश में 20,967 हेक्टेयर और असम में 14,032 हेक्टेयर क्षेत्र को इस मिशन के दायरे में लाया गया. सरकार के मुताबिक, NMEO-OP के तहत दूसरे राज्यों में भी पाम ऑयल का रकबा बढ़ाया गया है. ओडिशा में 9,977 हेक्टेयर, नागालैंड में 8,459 हेक्टेयर और कर्नाटक में 7,045 हेक्टेयर क्षेत्र को मिशन के तहत लाया गया है.

त्रिपुरा में 6,137 हेक्टेयर क्षेत्र मिशन के तहत आया

इसके अलावा छत्तीसगढ़ में 4,242 हेक्टेयर, मिजोरम में 3,617 हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1,579 हेक्टेयर, गुजरात में 542 हेक्टेयर और केरल में 434 हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती शुरू की गई. मणिपुर में 238 हेक्टेयर और गोवा में 50 हेक्टेयर क्षेत्र इस मिशन के तहत आया है. सरकार ने बताया कि त्रिपुरा में 2023-24 से राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम ऑयल (NMEO-OP) लागू किया जा रहा है. अब तक राज्य में 6,137 हेक्टेयर क्षेत्र को इस मिशन के तहत पाम ऑयल की खेती के लिए लाया गया है.

पाम ऑयल के संभावित रकबे का सिर्फ 29 फीसदी इस्तेमाल

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 15 राज्यों में पाम ऑयल की खेती के लिए 21.7 लाख हेक्टेयर संभावित क्षेत्र की पहचान  की गई है. इनमें से अभी 6,40,264 हेक्टेयर में ही पाम ऑयल की खेती हो रही है. यानी कुल संभावित क्षेत्र का करीब 29 फीसदी ही इस्तेमाल हो रहा है. पाम ऑयल की मौजूदा खेती के मामले में आंध्र प्रदेश सबसे आगे है. राज्य में 2,82,511 हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती हो रही है. इसके बाद तेलंगाना में 1,19,494 हेक्टेयर और कर्नाटक में 53,999 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हो रही है.

असम और अरुणाचल में बड़ा संभावित रकबा

ओडिशा में 33,107 हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती हो रही है, जबकि वहां 34,291 हेक्टेयर क्षेत्र को संभावित माना गया है. तमिलनाडु में 34,561 हेक्टेयर के मुकाबले 95,719 हेक्टेयर क्षेत्र संभावित है. वहीं, अरुणाचल प्रदेश में 25,213 हेक्टेयर और असम में 16,528 हेक्टेयर में खेती हो रही है, जबकि इन दोनों राज्यों में क्रमशः 1,33,811 और 3,75,428 हेक्टेयर संभावित क्षेत्र है.

सरकार ने आर्थिक सहायता बढ़ाने से किया इनकार

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम ऑयल (NMEO-OP) के तहत किसानों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने से इनकार कर दिया है. लोकसभा में सरकार से पूछा गया था कि क्या पाम ऑयल के रकबे को बढ़ाने वाले कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव है. सरकार ने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार ने बताया कि खाद्य तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दो मिशन चलाए जा रहे हैं. इनमें NMEO-OP और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) शामिल हैं. NMEO-OS को 2024-25 में शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य प्रमुख तिलहन फसलों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है.

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Published: 12 Aug, 2026 | 02:28 PM

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