उन्नत किस्म के बीजों की उपलब्धता दिक्कतें दूर करने के लिए राजस्थान में पहला ऑटोमेटिक बीज प्लांट लगाने को मंजूरी दे दी गई है. यह प्लांट कोटा कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करेगा और उसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से राशि की भी मंजूरी मिल गई है. इस प्लांट में पहले चरण में 7 अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी जो सोयाबीन, गेहूं, दालों समेत अन्य फसलों के उन्नत बीजों की छंटाई रंग, साइज को पहचान कर कलर सॉर्टिंग तकनीक से करेंगी. यह देश का दूसरा और राजस्थान का इस तरह का पहला बीज प्लांट है.
बीज प्लांट के लिए 9 करोड़ रुपये स्वीकृत
राजस्थान के कोटा स्थित कृषि विश्वविद्यालय में राज्य का पहला और देश का दूसरा अत्याधुनिक ऑटोमैटिक बीज प्लांट स्थापित किया जाएगा. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने इस विशेष परियोजना के लिए 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. उल्लेखनीय है कि पूरे देश में इस तरह के केवल दो प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं, जिनमें से पहला भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली और दूसरा कोटा कृषि विश्वविद्यालय को मिला है.
बीजों की प्रॉसेसिंग से पैकेजिंग तक सब होगी
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला डुंकवाल ने जारी बयान में कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत विश्वविद्यालय परिसर में ऑटोमैटिक सीड प्लांट लगाया जाएगा. इसके लिए लगभग 2.5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी और 2.5 करोड़ रुपये की लागत से नया भवन तैयार किया जाएगा. यह प्लांट चालू होने के बाद बीजों की प्रोसेसिंग, सफाई, छंटाई और पैकिंग का पूरा काम पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से होगा.
गेहूं, सोयाबीन समेत कई फसलों के बीज तैयार होंगे
कृषि विश्वविद्यालय के आधिकारिक बयान में इस प्लांट की सबसे बड़ी विशेषता कलर सॉर्टिंग सिस्टम को बताया गया है. यह मशीन रंग के आधार पर अच्छे बीजों की पहचान करेगी और गेहूं या अन्य फसलों में से खराब, काले, बारीक या पकने से पहले हरे रह गए दानों को बीनकर बाहर निकाल देगी. इसके अतिरिक्त, मशीन बीजों के साथ मिलने वाले छोटे कंकड़-पत्थर, धूल-मिट्टी के कण और भूसे को पूरी तरह अलग कर देगी. प्लांट में लगातार काम करने वाली 5 से 7 मशीनें एक कतार में स्थापित होंगी, जो बीजों की सफाई से लेकर अंतिम पैकिंग तक का सारा कार्य खुद-ब-खुद पूरा करेंगी.
किसानों के लिए 100 फीसदी शुद्ध बीज उपलब्ध होंगे
हाड़ौती संभाग के कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ इलाके आते हैं और यहां पर सोयाबीन, गेहूं, सरसों और चने का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है. अक्सर बीजों में मिलावट, कंकड़, रोगग्रस्त या अधपके दाने होने के कारण फसलों का अंकुरण कम होता था और पैदावार प्रभावित होती थी. इस ऑटोमैटिक प्लांट के शुरू होने से किसानों को अपने ही संभाग में 100 फीसदी शुद्ध, प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाला बीज मिल सकेगा. इससे न केवल किसानों की लागत और मेहनत बचेगी, बल्कि फसल की गुणवत्ता में सुधार होने से उन्हें मंडियों में अपनी उपज का बेहतर और उचित दाम मिल सकेगा.