IMD Monsoon Forecast September: भारत में मॉनसून सीजन अब ऐसे दौर में पहुंच गया है, जब आमतौर पर अच्छी बारिश की उम्मीद रहती है. लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो हफ्तों यानी 2 सितंबर तक देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है. इससे पहले ही देश में बारिश की कमी 14 फीसदी तक पहुंच चुकी है. अगर बारिश का यही रुख जारी रहा तो यह अंतर और बढ़ सकता है. इस स्थिति ने खेती को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि कई इलाकों में खरीफ फसलों के बाद अब रबी सीजन की तैयारियां भी शुरू हो रही हैं.
हिमालय में ज्यादा बारिश, बाकी हिस्सों में कमी
IMD के मुताबिक, आने वाले दिनों में हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. वहीं, प्रायद्वीपीय भारत में अगले सप्ताह बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान है. उत्तर बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट के पास 24 घंटे के भीतर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. इसके असर से 26 अगस्त तक ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. हालांकि, इसका फायदा पूरे देश को मिलने की उम्मीद नहीं है. सबसे बड़ी परेशानी मॉनसून ट्रफ की स्थिति को लेकर है.
मॉनसून ट्रफ की दिशा बनी परेशानी
मॉनसून ट्रफ इस समय हिमालय की तलहटी के पास टिकी हुई है. आमतौर पर अगस्त में यह दक्षिण की ओर खिसककर मध्य भारत से गुजरती है. इससे मध्य भारत के बड़े हिस्से में अच्छी बारिश होती है, जो खेती के लिए काफी अहम मानी जाती है. लेकिन इस बार ट्रफ के हिमालय के पास ही बने रहने की संभावना है. ऐसे में मध्य भारत और देश के दूसरे हिस्सों में बारिश कमजोर रह सकती है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति करीब एक सप्ताह और बनी रही तो बारिश की कमी और बढ़ सकती है.
स्काईमेट ने भी घटाया मॉनसून का अनुमान
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने भी अपने पूरे सीजन के अनुमान को काफी कम कर दिया है. एजेंसी ने अब मॉनसून सीजन में बारिश को सामान्य के मुकाबले सिर्फ 85 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले अप्रैल में उसने 94 फीसदी बारिश का अनुमान जताया था. स्काईमेट ने इस सीजन में सूखे की 70 फीसदी संभावना भी बताई है. एजेंसी के मुताबिक, अगस्त के बचे हुए दिनों और सितंबर में बारिश का वितरण असमान रह सकता है.
पूर्वोत्तर और दक्षिण में सबसे ज्यादा कमी
बारिश की कमी पूरे देश में एक जैसी नहीं है. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से करीब 26 फीसदी कम बारिश हुई है. दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र में भी बारिश 23 फीसदी पीछे है. उत्तर-पश्चिम भारत में यह कमी करीब 11 फीसदी है, जबकि मध्य भारत में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. यहां बारिश सामान्य से करीब 3 फीसदी कम है.
किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
कमजोर मॉनसून का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है. खासकर उन इलाकों में ज्यादा परेशानी हो सकती है, जहां खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर है. विशेषज्ञों के मुताबिक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों के बारिश आधारित क्षेत्रों में इस बार मॉनसून का व्यवहार काफी अस्थिर रहा है. तुअर दाल, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों पर खास नजर रखने की जरूरत बताई गई है. अगर आने वाले दिनों में बारिश की कमी और बढ़ती है तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है.
महंगाई का भी बढ़ सकता है खतरा
मॉनसून की कमजोर स्थिति सिर्फ किसानों की चिंता नहीं बढ़ाती, बल्कि इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है. फसलों का उत्पादन कम होने पर दाल, अनाज और दूसरी कृषि उपज की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि कमजोर मॉनसून से आने वाले दिनों में खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में सरकार के लिए फसल उत्पादन, बाजार में सप्लाई और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा.