हरियाणा में पराली जलाने के मामलों को कम करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. कृषि और किसान कल्याण विभाग ने सभी कंबाइन हार्वेस्टर्स में सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (Super-SMS) लगाना अनिवार्य कर दिया है. यह नियम धान की कटाई के मौसम से पहले लागू होगा. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बिना इस सिस्टम के कोई भी हार्वेस्टर काम नहीं करेगा और अगर किसी ने नियमों का उल्लंघन किया, तो मशीन को पूरे सीजन के लिए जब्त कर लिया जाएगा.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विभाग के निदेशक ने एक पत्र में सभी उप आयुक्तों, उप कृषि निदेशकों (DDA) और सहायक कृषि इंजीनियरों से कड़े अनुपालन की अपील की है. करनाल के डीडीए डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि हमने कंबाइन हार्वेस्टर के मालिकों को इस सिस्टम को कटाई से पहले लगवाने के लिए कहा है. किसानों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनकी खेतों की कटाई केवल SMS से लैस मशीनों से ही हो. यदि कोई भी कंबाइन हार्वेस्टर बिना सिस्टम के पाया गया, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा.
करनाल जिले में 1,458 कंबाइन हार्वेस्टर्स रजिस्टर
वर्तमान में करनाल जिले में 1,458 कंबाइन हार्वेस्टर्स रजिस्टर हैं और ऑपरेटरों को कटाई शुरू करने से पहले एक प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा. यह कदम हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के निर्देशों के अनुसार उठाया गया है. डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि सुपर-SMS धान के तने को काटकर उसे समतल तरीके से खेत में फैला देता है, जिससे गेहूं सीधे बोया जा सकता है और पराली जलाने की आवश्यकता नहीं रहती. इससे न केवल वायु प्रदूषण रुकता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. इस वर्ष करनाल में लगभग 1.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई है.
पराली जलाने पर कितना होगा जुर्माना
डीडीए ने कहा कि पराली जलाने के मामलों को रोकने के लिए गांव, ब्लॉक, तहसील और जिले स्तर पर निगरानी टीमों का गठन किया जा रहा है. जो किसान पराली जलाते हुए पाए जाएंगे, उन्हें आग के आकार के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा. उन्होंने कहा कि दो एकड़ में पराली जलाने पर 5,000, पांच एकड़ में 10,000 और पांच एकड़ से अधिक में पराली जलाने पर 30,000 रुपये का जुर्माना होगा. इसके अलावा, violators के राजस्व रिकॉर्ड में ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल पर लाल प्रविष्टियां की जाएंगी.
हरियाणा में पराली जलाने के कितने मामले
डॉ. सिंह ने किसानों से अपील की कि वे केंद्र सरकार की ‘इंसिटू क्रॉप रेजिडू मैनेजमेंट स्कीम’ के तहत पराली प्रबंधन उपकरणों का प्रभावी उपयोग करने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (CHCs) स्थापित करें. इस स्कीम के तहत ऐसे उपकरणों की खरीद के लिए 50 फीसदी तक की सब्सिडी दी जा रही है. हालांकि, हरियाणा में 2024 में पराली जलाने के 1,406 मामले दर्ज किए गए. डीडीए ने कहा कि जबकि 2023 में 2,303, 2022 में 3,661 और 2021 में 6,987 मामले सामने आए थे. करनाल जिले में 2024 में 95 मामले दर्ज किए गए, 2023 में 126, 2022 में 301 और 2021 में 956 मामले थे.