Haryana News: हरियाणा के करनाल में पिछले 12 दिनों से जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) के पद पर कोई अधिकारी न होने के कारण कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो गई है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग से धान पाने वाले राइस मिलर्स सरकार को चावल नहीं दे पा रहे हैं, क्योंकि ई-खरीद पोर्टल पर एंट्री और डिलीवरी की प्रक्रिया के लिए DFSC के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाला ओटीपी जरूरी होता है.
अधिकारियों के मुताबिक, अंबाला के DFSC जितेश गोयल को करनाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, लेकिन वे गुरुवार दोपहर बाद ही जॉइन कर पाए, इसलिए उस दिन चावल की डिलीवरी शुरू नहीं हो सकी. विभाग ने उनके मोबाइल नंबर को ओटीपी सिस्टम में जोड़ने के लिए पत्र भेज दिया है और उम्मीद जताई है कि शुक्रवार से CMR की डिलीवरी शुरू हो जाएगी. मिलर्स का कहना है कि मौजूदा नीति के तहत दिसंबर के अंत तक अलॉट किए गए CMR का 15 फीसदी हिस्सा जमा करना जरूरी था, लेकिन DFSC की अनुपस्थिति के कारण खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को चावल की आपूर्ति अब तक शुरू नहीं हो पाई है.
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कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया
राइस मिलर्स ने कहा कि उन्होंने हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन की ओर से अलॉट किए गए धान का कस्टम मिल्ड राइस (CMR) एफसीआई को देना शुरू कर दिया है. हालांकि, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के तहत अलॉट धान के बदले चावल की आपूर्ति अब भी रुकी हुई है. करनाल में डीएफएससी का पद दिसंबर के अंत में गुरुग्राम से जुड़े एक मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा तत्कालीन डीएफएससी की गिरफ्तारी के बाद से खाली पड़ा था. इसके बाद जिले में CMR व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया.
किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई
करनाल राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता ने कहा कि पुराने डीएफएससी की गिरफ्तारी के बाद जिले में किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई, जिससे CMR डिलीवरी पूरी तरह ठप हो गई. उन्होंने कहा कि इस सीजन से सरकार ने CMR नीति में बदलाव किया है, जिसके तहत मिलर्स को चावल की आपूर्ति से पहले अपने पुराने रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित खरीद एजेंसी के पक्ष में एफडीआर या बैंक गारंटी देना अनिवार्य कर दिया गया है. पहले बिना एफडीआर या बैंक गारंटी के भी चावल की डिलीवरी की अनुमति थी.
चावल जून के अंत तक जमा कर दिया था
नई नीति के अनुसार, जिन मिलर्स की अपनी मिलें हैं और जिन्होंने पिछले सीजन का चावल जून के अंत तक जमा कर दिया था, उन्हें अलॉट किए गए कुल धान पर 2,592 रुपये प्रति क्विंटल की दर से राशि जमा करनी होगी. वहीं, लीज पर मिल चलाने वाले मिलर्स को कुल लागत का 3 फीसदी बैंक गारंटी के रूप में देना होगा. गुप्ता ने कहा कि करनाल के कई मिलर्स ने नई नीति के तहत जरूरी एफडीआर जमा कर दी है, लेकिन डीएफएससी के न होने के कारण खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को चावल की डिलीवरी अब तक शुरू नहीं हो पाई है.