किसान तभी खुशहाल होगा जब वह टिकाऊ खेती को अपना ले और उसे मजबूत सिंचाई प्रणाली का लाभ मिले. बिहार के मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान सम्मेलन बिहार की कृषि, भारत का भविष्य – विकसित भारत 2047” विषय पर कृषि वैज्ञानिकों ने अपने विचार रखे. जलशक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा कि किसानों को खेती के लिए जल संरक्षण और कुशल जल प्रबंधन करना होगा, ताकि उन्हें सिंचाई के संकट से मुक्ति मिल जाए.
450 प्रगतिशील किसान सम्मेलन का हिस्सा बने
बिहार के मुजफ्फरपुर में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड की ओर से “बिहार की कृषि, भारत का भविष्य – विकसित भारत 2047” विषय पर किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया. यह सम्मेलन भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी जी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ. सम्मेलन में नीति निर्धारकों, कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा बिहार के विभिन्न जिलों से आए लगभग 450 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जो राज्य में कृषि के प्रति व्यापक जनभागीदारी और जागरूकता को दर्शाता है.
राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी ने जल प्रबंधन पर जोर दिया
मुख्य अतिथि राज भूषण चौधरी जी ने किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषि में जल संरक्षण, कुशल जल प्रबंधन और टिकाऊ सिंचाई प्रणालियों की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता और ग्रामीण समृद्धि की कुंजी है.
- पीएम फसल बीमा योजना में बड़ा घोटाला, जालसाजों ने 5 करोड़ रुपये हड़पे.. 26 पर एक्शन और एक सस्पेंड
- प्रदूषण से 2022 में 17 लाख भारतीयों की मौत, पराली बनी वजह या कोई और है कारण, यहां जानिए
- आठवें वेतन आयोग से कितनी बढ़ेगी सैलरी? वेतन दोगुना होगा या भत्ते बढ़ेंगे.. जानिए पूरा गणित
- 60 फीसदी छोटे किसानों तक नहीं पहुंच पा रही वित्तीय मदद, पैसा हासिल करना बन रहा चुनौती
पर्यावरण अनुकूल खेती किसानों के लिए जरूरी है
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. गोपाल त्रिवेदी ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए क्षेत्र-विशिष्ट तकनीकों और ज्ञान प्रसार को सशक्त करने की जरूरत बताई. धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार एवं भारत सरकार के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डॉ. पीके चक्रवर्ती ने वैज्ञानिक आधार पर आधारित फसल सुरक्षा, कृषि आदानों के संतुलित उपयोग और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों की महत्ता को रेखांकित किया.
किसानों तक उन्नत तकनीक और सरकारी योजनाएं पहुंचाना जरूरी
आईसीएआर-अटारी जोन-IV, पटना के निदेशक डॉ. अंजनी कुमार ने कृषि विस्तार तंत्र और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए किसानों तक उन्नत तकनीकों और सरकारी योजनाओं को पहुंचाने की आवश्यकता बताई. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU) के कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेन्दु पांडेय ने बिहार की अपार कृषि क्षमता, विशेष रूप से फसल विविधीकरण और मूल्य श्रृंखला विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया तथा मखाना बोर्ड की भूमिका पर भी प्रकाश डाला. RPCAU के विस्तार निदेशक डॉ. आरके झा ने किसान क्षमता निर्माण, विस्तार सेवाओं को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से संस्थानों को जोड़ने की जरूरत बताई.
फसल सुरक्षा समाधान अपनाकर किसानों की कमाई बढ़ी
तकनीकी सत्र में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने बिहार की कृषि जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप एकीकृत फसल सुरक्षा समाधान और जिम्मेदार इनपुट उपयोग पर आधारित अपने उत्पादों और सेवाओं की जानकारी दी. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट एवं नेशनल मार्केटिंग हेड श्री अनुपम पाल ने धानुका के नवाचार, गुणवत्ता और मजबूत फील्ड सपोर्ट सिस्टम पर आधारित दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य किसानों की उत्पादकता और आय में बढ़ोत्तरी करना है. उन्होंने कंपनी के मूल मंत्र “धानुका का प्रणाम, हर किसान के नाम” को दोहराया.