देश में टमाटर की कीमतें फिर बढ़ने लगी हैं. फरवरी-मार्च की तेज गर्मी से कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल को नुकसान हुआ, जिससे बाजार में टमाटर की आपूर्ति कम हो गई है. वहीं, खरीफ सीजन की बुवाई में देरी के कारण नई फसल के आने में भी समय लग सकता है. ऐसे में विशेषज्ञों का अनुमान है कि जुलाई और अगस्त के दौरान टमाटर की कीमतें 90 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती हैं. वहीं, सरकार ने दूसरे अग्रिम अनुमान में टमाटर का उत्पादन अनुमान 2.27 करोड़ टन से घटाकर 2.15 करोड़ टन कर दिया गया है.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में टमाटर की खुदरा कीमतों में 16 प्रतिशत और पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. 30 जून तक टमाटर का औसत खुदरा भाव 42.5 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. थोक बाजारों में भी कीमतों में तेजी बनी हुई है, जहां भाव पिछले महीने के मुकाबले 18 प्रतिशत और पिछले साल की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक हैं.
रबी फसल की हिस्सेदारी 30 से 35 प्रतिशत होती है
नेशनल कमोडिटीज मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड (NCML) के प्रबंध निदेशक और सीईओ संजय गुप्ता ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि प्रमुख बाजारों में टमाटर के दाम 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि फरवरी-मार्च की अत्यधिक गर्मी से फसल प्रभावित हुई, जबकि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन लागत भी बढ़ गई है, जिसका असर टमाटर की कीमतों पर पड़ रहा है. टमाटर की मौजूदा महंगाई ऐसे समय में बढ़ी है, जब बाजार में इसकी आपूर्ति पहले से ही कम रहती है. टमाटर की फसल 60 से 90 दिनों में तैयार होती है और इसकी खेती साल में तीन सीजन में की जाती है. कुल उत्पादन में खरीफ फसल की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत, जबकि रबी फसल की हिस्सेदारी 30 से 35 प्रतिशत होती है. फरवरी-मार्च में बोई जाने वाली गर्मी की फसल जून से अगस्त के बीच बाजार में आपूर्ति बनाए रखने का काम करती है.
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सरकार ने घटाया टमाटर उत्पादन का अनुमान
इस साल प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी के कारण गर्मी की फसल को नुकसान पहुंचा, जिससे उत्पादन घट गया. वहीं, कई इलाकों में मॉनसून की असमान प्रगति के कारण खरीफ बुवाई भी प्रभावित हुई है. इससे नई फसल के बाजार में आने में देरी की आशंका बढ़ गई है, जिसके चलते कीमतों पर दबाव बना हुआ है. सरकार ने भी टमाटर उत्पादन का अनुमान घटा दिया है. दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में टमाटर का उत्पादन 2.27 करोड़ टन के पहले अनुमान से घटाकर 2.15 करोड़ टन कर दिया गया है. यानी उत्पादन अनुमान में लगभग 5 प्रतिशत की कमी की गई है, जो आने वाले महीनों में कीमतों को ऊंचा बनाए रख सकती है. कृषि विश्लेषकों का मानना है कि टमाटर का वास्तविक उत्पादन सरकारी अनुमान से भी कम रह सकता है.
100 रुपये किलो तक पहुंच सकती हैं कीमतें
एजीएलैब्स (agAlabs) के रिसर्च प्रमुख राम गोपाल यादव ने कहा कि आमतौर पर जून से अगस्त के बीच भारी बारिश के कारण परिवहन और आपूर्ति प्रभावित होने से टमाटर के दाम बढ़ते हैं. लेकिन इस बार व्यापक बारिश शुरू होने से पहले ही कीमतों में तेजी आ गई है, जो बाजार में आपूर्ति की बड़ी कमी का संकेत है. यादव के अनुसार, यदि टमाटर की आपूर्ति सीमित रही और मॉनसून से जुड़ी बाधाएं बढ़ीं, तो जुलाई और अगस्त में खुदरा कीमतें 90 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती हैं. वहीं, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून में देरी के कारण खरीफ सीजन की बुवाई धीमी पड़ सकती है, जिससे नई फसल बाजार में देर से पहुंचेगी और कीमतों को सहारा मिलता रहेगा.
टमाटर की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषण शर्मा ने कहा कि जुलाई और अगस्त के दौरान टमाटर की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं, क्योंकि यह समय आमतौर पर आपूर्ति के लिहाज से कमजोर माना जाता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों जैसी अत्यधिक तेजी की संभावना कम है. इसकी वजह यह है कि गर्मी की फसल की आवक अलग-अलग समय पर हो रही है, खासकर दक्षिण भारत के उन राज्यों से जहां किसानों ने गर्मी से नुकसान के बाद दोबारा रोपाई की थी. इससे बाजार में कुछ हद तक अतिरिक्त आपूर्ति बनी रहेगी और कीमतों में अत्यधिक उछाल पर रोक लग सकती है.
दिल्ली की मंडियों में टमाटर का रेट 2220 रुपये प्रति क्विंटल
क्रिसिल के अनुसार, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्यों में थोक बाजारों में टमाटर का भाव फिलहाल 1,200 से 1,800 रुपये प्रति 100 किलो के बीच चल रहा है. वहीं, दिल्ली की मंडियों में यही कीमत करीब 2,220 रुपये प्रति 100 किलो तक पहुंच गई है, जो आपूर्ति की कमी और बढ़ती मांग को दर्शाती है. गौरतलब है कि वर्ष 2023 में टमाटर के दाम देश के कई हिस्सों में 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे. उस समय समय से पहले आई भीषण गर्मी से उत्पादन प्रभावित हुआ था और जुलाई में हुई भारी बारिश ने परिवहन व्यवस्था को बाधित कर दिया था. कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से टमाटर खरीदकर बड़े उपभोग केंद्रों में आपूर्ति कराई थी.