Papaya Farming : आज के समय में किसान ऐसी फसल चाहते हैं, जिसमें खर्च कम हो, जोखिम कम हो और कमाई जल्दी शुरू हो जाए. इसी तलाश में अब पपीते की खेती किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है. खास बात यह है कि अब पपीते की एक नई किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो कम लागत में शानदार उत्पादन देकर आमदनी को कई गुना बढ़ा सकती है.
कम लागत, ज्यादा मुनाफा-पपीते की खेती क्यों है खास
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पपीते की खेती में दूसरी फसलों की तुलना में लागत काफी कम आती है. अगर किसान आधे एकड़ में पपीता लगाते हैं, तो कुल खर्च करीब 20 से 25 हजार रुपये तक आता है. वहीं, एक ही फसल से डेढ़ से दो लाख रुपये तक की आमदनी संभव बताई जा रही है. पपीते का पौधा नर्सरी में सिर्फ 7 से 10 रुपये में आसानी से मिल जाता है, जिससे शुरुआती निवेश भी बहुत कम रहता है.
15 नंबर किस्म से मिल रहा शानदार उत्पादन
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पहले पपीते की कुछ पुरानी किस्में ज्यादा चलन में थीं, लेकिन अब नई 15 नंबर किस्म किसानों को ज्यादा फायदा दे रही है. इस किस्म की खासियत यह है कि इसका उत्पादन ज्यादा होता है और फल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. एक अच्छा और स्वस्थ पपीते का पेड़ 80 से 90 किलो तक फल दे सकता है. सबसे बड़ी बात यह है कि रोपाई के 8-9 महीने बाद ही फल आना शुरू हो जाता है, जिससे किसान को जल्दी कमाई मिलने लगती है.
सही मिट्टी और देखभाल से बढ़ेगी पैदावार
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पपीते की खेती बलुई दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी मानी जाती है. खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, वरना पौधे खराब हो सकते हैं. पौधों के बीच सही दूरी रखना, समय पर सिंचाई करना और जैविक खाद का इस्तेमाल करने से उत्पादन और भी बढ़ जाता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान पपीते का बीज ऑनलाइन मंगाने से बचें और सीधे भरोसेमंद नर्सरी से पौधे खरीदें, ताकि फसल में किसी तरह की दिक्कत न आए.
रेगुलर इनकम और मजबूत होती खेती की आर्थिकी
पपीते की खेती की एक बड़ी खासियत यह भी है कि किसान इसे अपनी मुख्य फसल के साथ खेत के किसी हिस्से में लगा सकते हैं. इससे उन्हें नियमित आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया मिल जाता है. पपीते की बाजार में सालभर मांग बनी रहती है, क्योंकि यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. पाचन सुधारने से लेकर इम्यून सिस्टम मजबूत करने तक, इसके कई फायदे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पपीते की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि इस फसल ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है. कम लागत, कम मेहनत और अच्छा मुनाफा-यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में किसान पपीते की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं.