Cauliflower Farming: इस समय कई इलाकों में फूलगोभी उगाने वाले किसान एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं. खेत में खड़ी सफेद और चमकदार गोभी अचानक हरी या भूरी दिखाई देने लगी है. देखने में यह छोटी समस्या लग सकती है, लेकिन इसका सीधा असर बाजार भाव पर पड़ रहा है. रंग बदलते ही व्यापारी दाम कम कर देते हैं और मेहनत पर पानी फिर जाता है. राहत की बात यह है कि सही समय पर ध्यान देकर इस नुकसान से बचा जा सकता है.
क्या है ब्राउनिंग की समस्या और क्यों बदलता है रंग?
फूलगोभी के फूल का रंग बदलना आमतौर पर दो वजहों से होता है. पहली वजह है सीधी तेज धूप. जब गोभी का फूल पत्तों से ढका नहीं रहता और सीधे सूरज की रोशनी पड़ती है, तो उसका रंग हरा पड़ने लगता है. दूसरी बड़ी वजह है मिट्टी में बोरॉन नाम के सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी. जब मिट्टी में बोरॉन कम होता है, तो फूल पर जंग जैसे भूरे धब्बे दिखने लगते हैं. इसे ही ब्राउनिंग कहा जाता है. ऊसर या ज्यादा pH वाली मिट्टी में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. इसका असर सिर्फ रंग पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और वजन पर भी पड़ता है. ऐसे फूल बाजार में कम कीमत पर बिकते हैं.
मिट्टी की जांच है सबसे बड़ा बचाव
इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका है खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराना. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फूलगोभी के लिए 6.5 से 7.5 pH वाली मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. अगर मिट्टी का pH इससे ज्यादा है, तो पहले उसमें सुधार करना जरूरी है. संतुलित खाद और उर्वरकों का सही मात्रा में इस्तेमाल भी जरूरी है. बिना जांच के अंधाधुंध खाद डालना नुकसान पहुंचा सकता है. स्वस्थ और संतुलित मिट्टी फसल को मजबूत बनाती है और रंग भी साफ-सफेद बनाए रखती है. इसके साथ ही, कर्ड (फूल) बनने के समय पत्तों को हल्का सा मोड़कर फूल को ढक देना चाहिए, ताकि सीधी धूप न पड़े. यह छोटा सा कदम बड़े नुकसान से बचा सकता है.
बोरेक्स का सही इस्तेमाल देगा बेहतर परिणाम
अगर खेत में पहले से बोरॉन की कमी है, तो बोरेक्स का उपयोग काफी फायदेमंद साबित होता है. खेत तैयार करते समय प्रति हेक्टेयर लगभग 20 किलो बोरेक्स मिट्टी में मिलाया जा सकता है. यदि यह पहले नहीं डाला गया है, तो फूल बनने से पहले 0.1 फीसदी से 0.2 प्रतिशत बोरेक्स का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें. यह छिड़काव समय पर किया जाए तो फूल का रंग और आकार दोनों बेहतर रहते हैं. ध्यान रहे, बोरेक्स की मात्रा संतुलित होनी चाहिए. ज्यादा मात्रा भी नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए सही सलाह लेकर ही प्रयोग करें.
समय पर सावधानी से मिलेगा अच्छा दाम
फूलगोभी की खेती में रंग और चमक ही उसकी असली पहचान है. अगर फूल सफेद, सख्त और साफ है तो बाजार में अच्छा दाम मिलता है. लेकिन रंग बदलते ही कीमत गिर जाती है. थोड़ी सी जागरूकता, मिट्टी की जांच और सही पोषण प्रबंधन से इस समस्या को रोका जा सकता है. सही समय पर सही कदम उठाकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.