गोभी का रंग हो रहा है खराब? इस मौसम में बोरेक्स बनेगा किसानों का सबसे बड़ा सहारा

जनवरी में आलू की कटाई के बाद फूलगोभी किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा विकल्प बन सकती है. लेकिन बढ़ते तापमान में कर्ड का रंग बिगड़ना आम समस्या है. सही मिट्टी, संतुलित पीएच और बोरेक्स के उपयोग से फूलगोभी की सफेदी और उत्पादन दोनों बनाए रखे जा सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 Jan, 2026 | 11:30 PM

Cauliflower Farming : सर्दी ढलते ही खेतों का रंग बदलने लगता है. जनवरी में आलू की खुदाई के बाद कई किसान खाली खेत देखकर सोच में पड़ जाते हैं कि अब क्या बोया जाए. ऐसे समय में फूलगोभी एक ऐसा विकल्प बनकर सामने आती है, जो कम समय में तैयार होकर अच्छी कमाई दे सकती है. लेकिन बढ़ते तापमान के साथ एक बड़ी परेशानी भी सामने आती है-गोभी की सफेदी फीकी पड़ जाना. यही वजह है कि सही तरीके और थोड़ी समझदारी बहुत जरूरी हो जाती है.

क्यों बदल जाता है फूलगोभी का रंग

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में लगाई गई फूलगोभी  में अक्सर देखा जाता है कि कटाई के समय कर्ड सफेद न रहकर हरे या भूरे हो जाते हैं. इसका सीधा असर बाजार भाव पर पड़ता है. रंग बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण मिट्टी में जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और तापमान का बढ़ना माना जाता है. जैसे-जैसे मार्च में धूप तेज होती है, सीधी धूप फूल पर पड़ने से उसकी चमक कम हो जाती है और किसान को नुकसान झेलना पड़ता है.

रोपाई से पहले मिट्टी की जांच है जरूरी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फूलगोभी की खेती  शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराना बहुत जरूरी है. अगर मिट्टी का पीएच ज्यादा या बहुत कम होगा, तो पौधा पोषक तत्व ठीक से नहीं ले पाएगा. फूलगोभी के लिए 6.5 से 7.5 पीएच वाली मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है. ऊसर या असंतुलित जमीन में खेती करने से फूल का रंग बिगड़ने की समस्या और बढ़ जाती है. इसलिए बिना जांच के रोपाई करना जोखिम भरा साबित हो सकता है.

बोरेक्स से कैसे लौटेगी गोभी की चमक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फूलगोभी के सफेद और चमकदार कर्ड के लिए बोरेक्स बेहद अहम भूमिका निभाता है. खेत की तैयारी के समय 20 किलो बोरेक्स प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में मिलाने  से अच्छा परिणाम मिलता है. अगर किसी कारण से यह काम पहले न हो पाए, तो फूल बनने से पहले बोरेक्स का घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है. इसके लिए 0.1 से 0.2 प्रतिशत बोरेक्स प्रति लीटर पानी में घोलकर फसल पर स्प्रे करें. इससे फूल का रंग सुधरता है और वजन भी बढ़ता है.

नमी, दूरी और देखभाल से बढ़ेगा मुनाफा

जनवरी में फूलगोभी की खेती करते समय खेत में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. पौधों के बीच सही दूरी रखें ताकि हवा का संचार बना रहे. समय-समय पर हल्की सिंचाई करें और फसल पर नजर रखें. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सही उर्वरक प्रबंधन और देखभाल के साथ फूलगोभी 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. चमकदार सफेद फूल बाजार में अच्छी कीमत दिलाते हैं और किसान को कम समय में बेहतर मुनाफा मिल सकता है. अगर सही तकनीक अपनाई जाए, तो बढ़ते तापमान के बावजूद फूलगोभी की चमक और कमाई दोनों बरकरार रखी जा सकती हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 8 Jan, 2026 | 11:30 PM

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है