मटर में ज्यादा पानी बना सकता है नुकसान की वजह, जानिए सही सिंचाई तरीका और सही समय

रबी सीजन में मटर की फसल अच्छी कमाई देती है, लेकिन गलत सिंचाई नुकसान करा सकती है. ज्यादा पानी से जड़ों में मौजूद राइजोबियम ग्रंथियां खराब हो जाती हैं. सही समय और हल्की सिंचाई अपनाकर किसान फसल को सुरक्षित रखते हुए बेहतर पैदावार पा सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 Jan, 2026 | 07:55 PM

Pea Farming : रबी के मौसम में मटर की फसल किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बनती है, लेकिन इसकी खेती में थोड़ी सी चूक भी नुकसान करा सकती है. खासकर सिंचाई को लेकर लापरवाही मटर की जड़ों को कमजोर कर देती है. कई किसान ज्यादा पानी देकर यह सोचते हैं कि फसल और अच्छी होगी, लेकिन हकीकत इसके उलट है. गलत सिंचाई से मटर की जड़ों में बनने वाली राइजोबियम ग्रंथियां खराब हो जाती हैं, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन घट जाता है. ऐसे में सही समय और सही तरीके से सिंचाई करना बेहद जरूरी हो जाता है.

मटर की फसल को क्यों चाहिए कम पानी

मटर एक ऐसी फसल  है जिसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. इसकी जड़ें हल्की नमी में बेहतर काम करती हैं. अगर खेत में पानी भर जाए तो पौधों की जड़ें सांस नहीं ले पातीं और धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. इसका सीधा असर पौधों की हरीतिमा और दानों की गुणवत्ता पर पड़ता है. कई बार पौधे पीले पड़ जाते हैं और पूरी फसल खराब होने की नौबत आ जाती है. इसलिए मटर की खेती में कम लेकिन सही समय पर पानी का नियम अपनाना सबसे बेहतर माना जाता है.

राइजोबियम ग्रंथियां क्यों हैं इतनी जरूरी

मटर की जड़ों में छोटी-छोटी गांठें बनती हैं, जिन्हें राइजोबियम ग्रंथियां कहा जाता है. ये जड़े मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी बनाती हैं. इससे पौधे मजबूत होते हैं और फसल की पैदावार बढ़ती है. लेकिन अगर खेत में जलभराव हो जाए, तो ये जड़े नष्ट हो जाती हैं. जड़े खराब होते ही पौधों को पोषण  मिलना बंद हो जाता है और फसल कमजोर पड़ने लगती है. इसी वजह से मटर की सिंचाई में जल निकासी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

स्प्रिंकलर तकनीक से करें सुरक्षित सिंचाई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मटर की फसल में स्प्रिंकलर या मिनी स्प्रिंकलर तकनीक सबसे ज्यादा फायदेमंद  मानी जाती है. इस तरीके से खेत में पानी एक समान फैलता है और जरूरत से ज्यादा पानी नहीं रुकता. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और जड़ों को नुकसान नहीं होता. पहली सिंचाई फूल आने के समय करनी चाहिए और दूसरी सिंचाई फली बनने की अवस्था में. इन दोनों समय हल्की सिंचाई ही पर्याप्त होती है.

फली बनने के समय रखें खास सावधानी

जब मटर की फसल फली बनने की अवस्था में होती है, तब उसे सही नमी की जरूरत होती है. इस समय अगर ज्यादा पानी दे दिया गया तो फलियों का विकास रुक सकता है और दाने छोटे रह जाते हैं. इसलिए किसान इस चरण पर हल्की सिंचाई करें और खेत में कहीं भी पानी जमा न होने दें. अगर गलती से ज्यादा पानी भर जाए, तो तुरंत पानी निकालने की व्यवस्था करें. सही सिंचाई अपनाकर  किसान न सिर्फ फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि बेहतर और ज्यादा पैदावार भी हासिल कर सकते हैं.

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