हिमाचल प्रदेश के नौणी विश्वविद्यालय की फूलगोभी किस्म सोलन उज्जवला को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. इस किस्म को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में खेती के लिए उपयुक्त माना गया है. यह किस्म देरी से बुवाई के लिए और ज्यादा उत्पादन के लिए चर्चा में आई है. ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन वेजिटेबल क्रॉप्स (AICRP-VC) और तेलंगाना स्टेट हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने इस किस्म को किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा उत्पादन और कमाई कराने में सहायक बताया है.
हिमाचल प्रदेश के नौणी में स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की ओर से विकसित की गई फूलगोभी की खास किस्म सोलन उज्जवला की चर्चा हो रही है. विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस फूलगोभी किस्म को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. हाल ही में ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन वेजिटेबल क्रॉप्स (AICRP-VC) के सोलन केंद्र के वैज्ञानिकों ने तेलंगाना स्टेट हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी हैदराबाद में आयोजित AICRP-VC की 44वीं वार्षिक समूह बैठक में इस किस्म को सराहना मिली और इस किस्म के उत्पादन की सिफारिशें की गईं.
देरी से बुवाई और बेहतर क्वालिटी उत्पादन से चर्चा में है फूलगोभी किस्म
नौणी विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र कुमार मेहता ने फूलगोभी की ‘सोलन उज्ज्वला (2022/CAULVAR-3)’ को विकसित किया है. इस किस्म के विकास में डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज और डॉ. कुलदीप सिंह ठाकुर का भी योगदान रहा है. यह फूलगोभी किस्म देरी से तैयार होती है और कम समय में ज्यादा और बेहतर क्वालिटी वाला उत्पादन देने में सक्षम है. इस किस्म को 2022 से 2024 के दौरान AICRP-VC के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर किए गए परीक्षणों में लगातार बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली किस्म घोषित किया गया है. इस किस्म की अनुशंसा के अतिरिक्त इसके बीज संवर्धन तकनीक से संबंधित एक राष्ट्रीय सिफारिश तथा सब्जी फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन से संबंधित छह सिफारिशें भी मिली हैं.
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एक फूल डेढ़ किलो का होगा और 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार होगी
फूलगोभी की इस किस्म में सफेद, सघन और आकर्षक फूल विकसित होते हैं. इसके फूल का वजन लगभग 1.0 से 1.5 किलोग्राम होता है. वहीं, इसकी खेती करने वाले किसानों को लगभग 300–350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज हासिल होती है. यह एक ओपन पॉलिनेटेड किस्म है, जो महंगे संकर बीजों का किफायती विकल्प उपलब्ध कराती है. इस कारण यह विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी. इसके व्यापक उपयोग से क्षेत्र में देर से तैयार होने वाली फूलगोभी का भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पक्का होने के साथ किसानों की कमाई में बढ़ोत्तरी की संभावनाओं को बल मिलता है.
कुलपति ने फूलगोभी किस्म विकास को बड़ी उपलब्धि बताया
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है और वैज्ञानिकों के उत्कृष्ट अनुसंधान का परिणाम है. उन्होंने कहा कि ‘सोलन उज्ज्वला’ फूलगोभी किस्म का विकास और अनुशंसा किसान केन्द्रित कृषि अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. उन्होंने जोर दिया कि विश्वविद्यालय नवाचार, हाई क्वालिटी वाले अनुसंधान और ऐसी प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार के लिए निरंतर काम करता रहेगा, ताकि कम लागत और कम समय में ज्यादा उत्पादन हासिल हो और किसान की कमाई बढ़ सके.