J&K HADP scheme: जम्मू-कश्मीर में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए शुरू किया गया होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (HADP) अब धीरे-धीरे बड़े बदलाव की तस्वीर पेश कर रहा है. यह योजना किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. अब तक इस योजना के जरिए हजारों किसानों को सीधा फायदा मिला है और लाखों स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं.
क्या है HADP और क्यों शुरू किया गया?
द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, HADP जम्मू-कश्मीर सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे मार्च 2024 में शुरू किया गया था. इस योजना का मकसद खेती को पारंपरिक तरीके से निकालकर आधुनिक और लाभकारी मॉडल में बदलना है. इस कार्यक्रम के तहत 29 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है, जिनमें बेहतर बीज, खास फसलों की खेती, मशीनों का उपयोग और बाजार से जुड़ाव जैसे अहम पहलू शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य है कि किसान सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें बाजार में अच्छा दाम भी मिले.
1.11 लाख से ज्यादा यूनिट, 74 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इस योजना के तहत जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में 1.11 लाख से ज्यादा कृषि यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं. इन यूनिट्स के जरिए करीब 74,589 किसान परिवारों को सीधा लाभ मिला है. इससे साफ है कि योजना का असर धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है.
अभी भी विस्तार की बड़ी गुंजाइश
हालांकि योजना का दायरा पूरे प्रदेश में फैल चुका है, लेकिन अभी यह केवल करीब 8.1 फीसदी पीएम-किसान लाभार्थियों तक ही पहुंच पाई है. इसका मतलब है कि अभी बहुत से किसान इस योजना से जुड़ना बाकी हैं. इसी वजह से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसमें शामिल किया जाए.
आय बढ़ाने में दिख रहा असर
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा किसानों की आय में बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है. HADP के तहत लाभार्थियों को सालाना लगभग 368 करोड़ रुपये का राजस्व और करीब 173 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का अनुमान है. औसतन हर किसान परिवार की आय में लगभग 25,000 रुपये प्रति वर्ष की बढ़ोतरी हो रही है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है.
रोजगार के नए अवसर भी बने
इस योजना के तहत रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा असर देखने को मिला है. करीब 2.45 करोड़ मानव-दिवस (man-days) का रोजगार पैदा हुआ है. यह काम 287 ब्लॉकों और 5,100 से ज्यादा गांवों व वार्डों में हुआ है. इससे न सिर्फ किसानों को बल्कि ग्रामीण युवाओं को भी काम मिला है.
योजना की गुणवत्ता और कार्यान्वयन
योजना की प्रगति पर नजर डालें तो लगभग 92.9 फीसदी यूनिट्स पूरी तरह काम कर रही हैं और 99 फीसदी यूनिट्स की पुष्टि हो चुकी है. इसके अलावा 68.3 फीसदी लाभार्थियों को विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए नई तकनीक और खेती के तरीके सिखाए गए हैं. इससे किसानों की क्षमता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है.
सरकार का भरोसा और आर्थिक मजबूती
सरकार का मानना है कि यह योजना आर्थिक रूप से भी मजबूत है. करीब 450 करोड़ रुपये की सब्सिडी, किसानों की बढ़ी हुई आय के जरिए लगभग 2.6 साल में ही रिकवर हो सकती है. यह दिखाता है कि योजना सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में काम कर रही है.
किसान सेवा केंद्रों को और मजबूत करने की तैयारी
सरकार अब किसान खिदमत घर (KKGs) को और मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है. इन केंद्रों में लाइसेंसिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाने, बैंकिंग सेवाएं जोड़ने और डिजिटल सुविधाएं बढ़ाने की योजना है. इससे किसानों को एक ही जगह पर कई सेवाएं मिल सकेंगी.
डिजिटल तकनीक से बढ़ेगी पहुंच
अधिकारियों ने योजना को और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने पर जोर दिया है. विभिन्न सेवाओं और संस्थाओं को HADP पोर्टल से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि किसानों तक जानकारी और सुविधाएं तेजी से पहुंच सकें.