Goat Farming: खेती के साथ अतिरिक्त आय बढ़ाने के लिए किसान अब पशुपालन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. इनमें बकरी पालन सबसे लाभदायक व्यवसायों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें कम निवेश, कम जगह और कम रखरखाव की जरूरत होती है. साथ ही बकरी के दूध, मांस और बच्चों की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के डॉ वाई के सोनी के अनुसार, सही नस्ल का चयन करके किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं.
सिरोही नस्ल से मांस और दूध दोनों का लाभ
डॉ वाई के सोनी के अनुसार सिरोही नस्ल बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती है. ये नस्ल तेजी से वजन बढ़ाने की क्षमता रखती है, जिससे मांस उत्पादन के लिए इसकी मांग अधिक रहती है. कम समय में बेहतर वृद्धि होने के कारण किसानों को जल्दी आर्थिक लाभ मिल सकता है. इसके अलावा यह नस्ल सीमित मात्रा में दूध भी देती है, जिससे आय के अतिरिक्त स्रोत बनते हैं. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है, इसलिए पालन में जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है.
जमुनापारी नस्ल से दूध उत्पादन में बढ़त
दूध उत्पादन के उद्देश्य से बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए जमुनापारी नस्ल लाभदायक मानी जाती है. ये नस्ल प्रतिदिन अच्छी मात्रा में दूध देने की क्षमता रखती है. बड़े आकार और आकर्षक बनावट के कारण इसकी बाजार में भी अच्छी कीमत मिलती है. विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार और उचित देखभाल के साथ इस नस्ल से दूध और प्रजनन दोनों क्षेत्रों में बेहतर आय अर्जित की जा सकती है. यही वजह है कि इसे देश की प्रमुख दुग्ध उत्पादन वाली बकरी नस्लों में शामिल किया जाता है.
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ब्लैक बंगाल और सरकारी योजनाएं बढ़ा रही कमाई
ब्लैक बंगाल नस्ल छोटे और सीमांत किसानों के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है. इसका शरीर छोटा होने के कारण इसे पालना आसान होता है और यह कम चारे में भी अच्छी तरह विकसित हो जाती है. इस नस्ल का मांस उच्च गुणवत्ता का माना जाता है, जिसकी बाजार में काफी मांग रहती है. साथ ही इसकी खाल का उपयोग चमड़ा उद्योग में किया जाता है, जिससे अतिरिक्त आय की संभावना बनती है.
पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. वाई.के. सोनी के अनुसार, यदि किसान अपनी जरूरत और बाजार की मांग के अनुसार सही नस्ल का चयन करें तो बकरी पालन से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. उनका कहना है कि वर्तमान समय में सरकार और पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत अनुदान और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है. ऐसे में युवा और किसान छोटे स्तर से शुरुआत कर इस व्यवसाय को बड़े स्वरूप में बदल सकते हैं. सही प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बकरी पालन लाखों रुपये के वार्षिक टर्नओवर वाला सफल व्यवसाय बन सकता है.