बकरी पालन से बदल रही गांव की तस्वीर, अफ्रीकन बोअर नस्ल से किसान कर रहे बंपर कमाई

ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन अब तेजी से कमाई का साधन बन रहा है. खास नस्ल की बकरियां कम समय में ज्यादा वजन बढ़ाकर अच्छा मुनाफा देती हैं. आसान देखभाल, हर मौसम में अनुकूलता और बाजार में बढ़ती मांग के चलते पशुपालकों का रुझान इस ओर लगातार बढ़ रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 11 Jan, 2026 | 08:19 AM

African Boer Goat: सुबह की हल्की ठंड और उगते सूरज के साथ गांव की गलियों में एक अलग ही हलचल दिखाई देती है. खेत के किनारे बने शेड से आती बकरियों की आवाज अब सिर्फ रोजमर्रा की आदत नहीं, बल्कि बदलती किस्मत की पहचान बन चुकी है. जिस बकरी पालन को कभी छोटे किसान मजबूरी में अपनाते थे, वही आज सम्मान और कमाई का मजबूत जरिया बन रहा है. खेती की बढ़ती लागत और मौसम की मार के बीच पशुपालक अब ऐसी नस्ल की तलाश में हैं, जो कम समय में ज्यादा मुनाफा दे सके. इसी तलाश का जवाब बनकर सामने आई है अफ्रीकन बोअर बकरी. तेज वजन बढ़ने, आसान देखभाल और बाजार में बढ़ती मांग ने इस बकरी को गांव से शहर तक चर्चा का विषय बना दिया है.

मांस उत्पादन में नंबर वन बकरी

ग्रामीण इलाकों  में बकरी पालन हमेशा से किया जाता रहा है, लेकिन अब पशुपालक ऐसी नस्ल चाहते हैं, जो जल्दी बढ़े और बाजार में अच्छे दाम दिलाए. अफ्रीकन बोअर बकरी इसी जरूरत पर खरी उतरती है. इस बकरी की सबसे बड़ी खासियत इसका तेज वजन बढ़ना है. कम समय में इसका शरीर भर जाता है और मांस की क्वालिटी भी काफी बेहतर होती है. यही वजह है कि होटल, मीट मार्केट और त्योहारों के मौसम में इसकी भारी मांग रहती है. छह महीने में ही मेमना बिक्री के लायक हो जाता है, जिससे किसान को जल्दी पैसा मिल जाता है.

हर मौसम में ढल जाने वाली नस्ल

यह बकरी गर्म और सूखे मौसम में भी आसानी से रह लेती है. ज्यादा नाज-नखरे नहीं, बस साफ-सफाई और समय पर चारा मिल जाए तो यह अच्छी ग्रोथ देती है. यही कारण है कि अब कई राज्यों में किसान इसे तेजी से अपना रहे हैं. छोटे किसान से लेकर बड़े फार्म वाले तक, सभी के लिए यह नस्ल फायदेमंद साबित हो रही है. खास बात यह है कि यह दूसरी बकरियों के मुकाबले  ज्यादा मजबूत होती है और बीमारियां भी कम पकड़ती है.

कम खर्च, आसान देखभाल

अफ्रीकन बोअर बकरी पालन  के लिए बहुत महंगे इंतजाम की जरूरत नहीं होती. कुछ बकरियों के लिए छोटा सा शेड, हवा आने-जाने की जगह और सूखी फर्श काफी है. खाने में हरा चारा, थोड़ा सूखा चारा और सीमित मात्रा में दाना देने से बकरी स्वस्थ रहती है. साथ में खनिज मिश्रण और नीम की पत्तियां देने से रोगों से बचाव होता है. समय-समय पर टीकाकरण और सफाई रखने से नुकसान की आशंका काफी कम हो जाती है.

कमाई का मजबूत जरिया

यह नस्ल साल में दो बार बच्चे देती है, जिससे पशुपालक की आमदनी  लगातार बनी रहती है. एक नर बकरे के साथ कई मादा बकरियों का पालन किया जा सकता है. छोटे स्तर पर शुरुआत करने पर भी साल में अच्छी कमाई हो सकती है. वहीं अगर कोई किसान बड़े पैमाने पर फार्म तैयार करता है, तो यह व्यवसाय लाखों रुपये की आय का जरिया बन सकता है. यही वजह है कि आज ग्रामीण युवा भी बकरी पालन की ओर लौट रहे हैं और इसे रोजगार के रूप में अपना रहे हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 11 Jan, 2026 | 07:45 AM

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है