Dairy Farming: गांव की सुबह, आंगन में बंधी गाय-भैंस और ताजा दूध की खुशबू-यह तस्वीर अब मंडला जिले में और भी मजबूत होने वाली है. पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मध्यप्रदेश के अनुसार क्षीर धारा ग्राम योजना के तहत जिले के 73 गांवों को आदर्श दुग्ध उत्पादन और पशुपालन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा. इस योजना का उद्देश्य गांवों में आधुनिक पशुपालन को बढ़ावा देना, दूध उत्पादन बढ़ाना और पशुपालकों की आय में सुधार करना है.
73 गांवों को बनाया जाएगा आदर्श दुग्ध उत्पादन ग्राम
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश के मंडला जिले के 73 गांवों का चयन इस योजना के लिए किया गया है. इन गांवों में पशुपालन को व्यवस्थित और आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. योजना के तहत किसानों को बेहतर नस्ल के पशु, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन की जानकारी दी जाएगी. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आमदनी में भी सुधार होगा. सरकार का लक्ष्य है कि इन गांवों को ऐसा मॉडल बनाया जाए जिसे देखकर दूसरे गांव भी प्रेरित हों.
पशुओं की टैगिंग और पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा
इस योजना की एक खास बात यह है कि चयनित गांवों में पशुओं की शत-प्रतिशत टैगिंग की जाएगी. यानी हर पशु को एक खास पहचान नंबर दिया जाएगा. इस टैगिंग के जरिए पशुओं की पहचान, स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्रजनन और बीमा से जुड़ी सभी जानकारी रिकॉर्ड में रखी जाएगी. इससे पशुओं की देखभाल बेहतर तरीके से हो सकेगी और बीमारी होने पर समय पर इलाज मिल पाएगा.
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क्षीर धारा ग्राम योजना अंतर्गत मंडला जिले के 73 ग्राम बनेंगे आदर्श दुग्ध उत्पादन एवं पशुपालन ग्राम
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— Animal Husbandry Department, MP (@mp_husbandry) March 9, 2026
उन्नत नस्ल और कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ेगा दूध उत्पादन
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए योजना में खास तौर पर उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा ताकि बेहतर नस्ल के बछड़े पैदा हों. इसके साथ ही अवर्णित या कमजोर नस्ल के सांडों का बधियाकरण भी किया जाएगा. इससे नस्ल सुधार का काम तेज होगा और आने वाले समय में दूध देने वाले पशुओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.
पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और इलाज की बेहतर व्यवस्था
योजना के तहत पशुओं के स्वास्थ्य पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. चयनित गांवों में सभी पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण कराया जाएगा ताकि खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव हो सके. इसके अलावा पशुओं को समय-समय पर कृमिनाशक दवाएं दी जाएंगी और जरूरत पड़ने पर उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. विभाग द्वारा जागरूकता शिविर और बांझपन निवारण शिविर भी लगाए जाएंगे, जिससे पशुपालकों को नई जानकारी और तकनीक मिल सके.
हरे चारे और गोबर-गोमूत्र के उपयोग पर भी जोर
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार योजना में केवल दूध उत्पादन ही नहीं, बल्कि पशुपालन को पूरी तरह लाभदायक बनाने पर जोर दिया जाएगा. किसानों को हरा चारा उगाने, संतुलित पशु आहार देने और पशुओं की सही देखभाल के बारे में जानकारी दी जाएगी. इसके साथ ही गोबर और गोमूत्र के मूल्य संवर्धन पर भी फोकस रहेगा. गोबर से जैविक खाद और अन्य उत्पाद बनाकर किसान अतिरिक्त आय भी कमा सकेंगे.