5 पंचायतों में जमीन फाइनल… यूपी में अब बनेंगी 5 बड़ी गोशालाएं, शासन से मिली मंजूरी

Govansh Sanrakshan Yojana: यूपी में बेसहारा गोवंश संरक्षण को मजबूत करने के लिए पांच बड़ी गोशालाओं के निर्माण को मंजूरी मिल गई है. इससे पशुओं को बेहतर आश्रय, चारा और इलाज की सुविधा मिलेगी. किसानों की फसलें भी सुरक्षित रहेंगी और छोटे खर्चीले आश्रय स्थलों की जगह व्यवस्थित बड़े केंद्र तैयार होंगे.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 14 Apr, 2026 | 01:45 PM

Gaushala News Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में बेसहारा गोवंश की देखभाल को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है. बेसहारा गोवंश संरक्षण योजना (Govansh Sanrakshan Yojana) के तहत जिले में पांच बड़ी गोशालाओं के निर्माण को शासन से मंजूरी मिल गई है. पशुपालन विभाग ने पांच ग्राम पंचायतों में जमीन चिन्हित कर प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब हरी झंडी मिल चुकी है. फिलहाल बजट जारी होने का इंतजार है. बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा. नई बड़ी गोशालाएं बनने से बेसहारा पशुओं को बेहतर आश्रय, चारा, इलाज और निगरानी की सुविधा मिलेगी. साथ ही छोटे और ज्यादा खर्च वाले अस्थायी गोशालाओं का बोझ भी कम होगा.

पांच पंचायतों में बनेंगी बड़ी गोशालाएं

उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग  के अनुसार जिन पंचायतों में आधा हेक्टेयर से ज्यादा बंजर जमीन उपलब्ध है, वहां बड़ी गोशालाएं बनाई जाएंगी. जिले की पांच ग्राम पंचायतों में इसके लिए जमीन पहले ही चिन्हित कर ली गई है. योजना के तहत तुलसीपुर तहसील में तीन बड़ी गोशालाएं बनाई जाएंगी, जबकि बलरामपुर और उतरौला तहसील में एक-एक वृहद गोशाला बनेगी. जमीन का चयन इसलिए किया गया है ताकि पशुओं को खुले और सुरक्षित वातावरण में रखा जा सके. वृहद गोशाला बनने से एक ही जगह ज्यादा संख्या में पशुओं की बेहतर देखभाल हो सकेगी. इससे विभाग को चारा, पानी, शेड और स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन करने में आसानी होगी.

12 छोटी गोशालाएं बंद, बड़े मॉडल पर होगा संचालन

एक अप्रैल से जिले में 100 से कम पशुओं वाली अस्थायी गोशालाओं  को बंद करने का फैसला लागू कर दिया गया है. कम पशुओं वाली गोशालाओं में खर्च ज्यादा और सुविधा कम होने के कारण यह कदम उठाया गया. इसी के तहत 50 से कम पशु वाले 12 गोशाला बंद कर दिए गए हैं. इन गोशालाओं में रखे गए गोवंश को अन्य सक्रिय गोशालाओं में शिफ्ट करने के लिए संबंधित खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं. फिलहाल जिले में कुल 117 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें 89 अस्थायी गोशालाएं शामिल हैं. इन सभी में अभी 13,384 बेसहारा पशु संरक्षित हैं. नई बड़ी गोशालाएं बनने से यह व्यवस्था और मजबूत होगी.

इन पंचायतों में बनेंगी नई बड़ी गोशालाएं

विभाग ने जिन पंचायतों में जमीन चिन्हित की है, उनमें कई जगह पर्याप्त बंजर भूमि उपलब्ध है. उतरौला तहसील के विकास खंड गैंडासबुर्जुग के बिलारिया ग्राम पंचायत में 1.039 हेक्टेयर और गैंडासबुर्जुग में 0.571 हेक्टेयर जमीन तय की गई है. इसी तरह सदर तहसील के हरैयासतघरवा ब्लॉक की इमलिया पंचायत में 1.2 हेक्टेयर भूमि चिन्हित है. तुलसीपुर तहसील के चौरासी में 1.039 हेक्टेयर, कल्याणपुर में 1.153 हेक्टेयर और पुरुषोत्तमपुर में 1.437 हेक्टेयर जमीन पर गोशाला निर्माण होगा. इतनी बड़ी जमीन होने से पशुओं के लिए शेड, चारा भंडारण, पानी की टंकी  और चिकित्सा सुविधा एक ही परिसर में बनाई जा सकेगी.

किसानों और पशु संरक्षण दोनों को होगा बड़ा फायदा

नई वृहद गोशालाओं का फायदा सिर्फ पशुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों को भी राहत मिलेगी. बेसहारा गोवंश अक्सर खेतों में घुसकर फसलें नुकसान पहुंचाते हैं. बड़ी गोशालाएं बनने से इन्हें सुरक्षित आश्रय मिलेगा और किसानों की फसलें बचेंगी. राज्य स्तर पर भी यह योजना बड़े पैमाने पर चल रही है. उत्तर प्रदेश में इस समय 7,700 से ज्यादा गो-आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 14 से 16 लाख से अधिक बेसहारा गोवंश संरक्षित हैं. सरकार इनकी निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल कर रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. राजेश शर्मा के अनुसार, जिले में पांच वृहद गोशालाओं के निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है और बजट मिलते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा. कुल मिलाकर यह कदम जिले में पशु संरक्षण व्यवस्था  को मजबूत करने के साथ किसानों को भी बड़ी राहत देने वाला साबित होगा.

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