गौवंश आश्रय स्थल के नाम जमीन घेरने वालों पर योगी का चला डंडा, 121 अस्थायी गौशालाएं बंद करने के निर्देश

गोशालाओं की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अस्थायी गोशालाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद कर मवेशियों को स्थायी और बड़े गोआश्रय स्थलों में रखा जाएगा. इससे पशुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और किसानों को बेसहारा मवेशियों से राहत मिलने की उम्मीद है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 25 Jan, 2026 | 05:22 PM

Cow Shelter : खेतों में फसल सुरक्षित रहे, सड़कों पर मवेशी न भटकें और पशुओं को सही देखभाल मिले-इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश में गोशालाओं की व्यवस्था में बड़ा बदलाव शुरू हो गया है. योगी सरकार ने बिना लाइसेंस और अवैध रूप से चल रही गोशालाओं पर सख्त रुख अपनाया है. इसके तहत अस्थायी गोशालाओं को बंद कर मवेशियों को बेहतर सुविधाओं वाले स्थायी गोआश्रय स्थलों में रखा जाएगा. वहीं, गौशालाओं के नाम सरकारी जमीनें घेरने की शिकायतों पर योगी सरकार ने एक्शन लिया है, ऐसे लोगों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इस फैसले से किसानों को राहत मिलेगी और पशुओं की जिंदगी भी ज्यादा सुरक्षित होगी.

अवैध और बिना लाइसेंस गोशालाओं पर सख्ती

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति और नियमों के चल रही गोशालाएं  अब नहीं चलेंगी. ऐसे स्थानों पर न तो मवेशियों की सही देखभाल हो पा रही थी और न ही बुनियादी सुविधाएं मिल रही थीं. इसी कारण सरकार ने इन्हें बंद करने का फैसला लिया है. प्रशासन का कहना है कि नियमों के तहत चलने वाली और पंजीकृत गोशालाओं में ही अब मवेशियों को रखा जाएगा. वहीं, गौशालाओं के नाम जमीन घेरने वालों पर भी योगी सरकार ने एक्शन लिया है, चिन्हित कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

प्रयागराज में 121 अस्थायी गोशालाएं होंगी बंद

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज जिले में चरणबद्ध तरीके से 121 अस्थायी गोशालाओं को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. पहले उन गोशालाओं को बंद  किया गया, जहां मवेशियों की संख्या बहुत कम थी. अब 50 मवेशियों वाली अस्थायी गोशालाओं को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. इन गोशालाओं में मौजूद मवेशियों को पास के बड़े और स्थायी गोआश्रय स्थलों में भेजा जा रहा है, ताकि उन्हें बेहतर सुविधा मिल सके.

2019 में शुरू हुई थी अस्थायी गोशालाओं की व्यवस्था

बताया जा रहा है कि साल 2019 में गांव-गांव अस्थायी गोशालाएं खोलने  के आदेश दिए गए थे. उस समय सड़कों पर घूम रहे बेसहारा मवेशियों से किसानों को राहत दिलाना मकसद था. इसके बाद जिले की ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में अस्थायी गोशालाएं बनीं. वर्तमान में गंगापार और यमुनापार क्षेत्र में करीब 121 स्थायी और अस्थायी गोशालाएं हैं, जिनमें लगभग 25 हजार बेसहारा मवेशी रखे गए हैं.

स्थायी गोआश्रय में मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

अस्थायी गोशालाओं की तुलना में स्थायी गोआश्रय स्थलों में सुविधाएं कहीं ज्यादा बेहतर मानी जाती हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्थायी गोशालाओं में 400 से 500 मवेशियों को रखने की क्षमता होती है. यहां चारे, पानी, शेड, साफ-सफाई और इलाज की बेहतर व्यवस्था रहती है. कई अस्थायी गोशालाओं में मवेशी कम रह गए थे, लेकिन खर्च बराबर आ रहा था. इसी वजह से सरकार ने स्थायी गोआश्रय पर फोकस बढ़ाया है. इसके लिए गोशाला निर्माण में जमीन के मानक भी आसान किए गए हैं.

नए गोआश्रय स्थलों का तेजी से निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में कई नए वृहद गोआश्रय स्थल निर्माणाधीन हैं और कुछ के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है. जहां निर्माण कार्य चल रहा है, वहां काम पूरा होते ही मवेशियों को स्थानांतरित किया जाएगा. इसके अलावा नए गोआश्रय स्थलों के लिए जमीन भी चिन्हित कर ली गई है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे नए स्थायी गोशाले तैयार होंगे, वैसे-वैसे अस्थायी और अवैध गोशालाएं बंद होती जाएंगी.

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Published: 25 Jan, 2026 | 04:42 PM

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