Pangasius Fish Farming: देशभर में किसान अब केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं रहना चाहते. बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच किसान ऐसे व्यवसायों की तलाश कर रहे हैं, जिनसे अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सके. ऐसे में मछली पालन किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है. कम समय में बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छी मांग के कारण मछली पालन का कारोबार तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. खासकर पंगेशियस (पंगस) मछली की खेती किसानों को आकर्षित कर रही है, क्योंकि इससे कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.
पंगेशियस मछली क्यों है खास?
पंगेशियस मछली की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेजी से बढ़ने की क्षमता है. यह मछली सामान्यतः 5 से 6 महीनों में बाजार में बेचने योग्य आकार प्राप्त कर लेती है. इसके अलावा इसकी बाजार में मांग भी लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती. यही वजह है कि कई राज्यों में किसान अब पारंपरिक मछलियों के साथ-साथ पंगेशियस का पालन भी बड़े पैमाने पर कर रहे हैं.
कम ऑक्सीजन और बीमारियों में भी बेहतर प्रदर्शन
विशेषज्ञों के अनुसार पंगेशियस मछली कम ऑक्सीजन वाले पानी में भी जीवित रह सकती है. सर्दियों के दौरान जब तालाबों में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, तब भी यह मछली अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से जीवित रहती है. इसके अलावा इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है. अन्य कई प्रजातियों की तुलना में यह जल्दी बीमार नहीं पड़ती, जिससे दवाओं और उपचार पर होने वाला खर्च कम हो जाता है. यही कारण है कि किसानों का जोखिम भी कम रहता है और उत्पादन बेहतर मिलता है.
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कम जगह में ज्यादा उत्पादन और लाखों की कमाई
पंगेशियस मछली की एक और बड़ी विशेषता ये है कि इसे अपेक्षाकृत कम जगह में भी पाला जा सकता है. सीमित क्षेत्र वाले किसान भी इसका पालन करके अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. यदि किसान एक एकड़ के तालाब में वैज्ञानिक तरीके से पंगेशियस मछली पालन करते हैं, तो उन्हें 5 से 6 महीनों में अच्छा उत्पादन मिल सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ तालाब से किसान औसतन 3 लाख से 6 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं. सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली सब्सिडी भी इस व्यवसाय को और अधिक लाभकारी बनाती है.
मछली पालन के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए पंगेशियस मछली किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प साबित हो रही है. कम लागत, तेज वृद्धि, अच्छी बाजार मांग और कम जोखिम जैसी खूबियों के कारण यह प्रजाति किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.