Bihar Poultry Hub: बिहार सरकार ने पोल्ट्री हब बनाने को मंजूरी दी, दूसरे राज्यों से नहीं खरीदना पड़ेगा मुर्गा-अंडा

Poultry Feed Plant: बिहार में पोल्ट्री सेक्टर को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है. गया और समस्तीपुर में बड़े प्लांट लगने से किसानों को सस्ता दाना, आसान चूजा सप्लाई और बेहतर बाजार मिलेगा. इससे रोजगार के नए मौके बनेंगे और राज्य अंडा-चिकन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Apr, 2026 | 01:34 PM

Bihar Poultry News : बिहार में पोल्ट्री सेक्टर को लेकर बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. अब राज्य को अंडा, चिकन और पोल्ट्री फीड के लिए दूसरे राज्यों पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार की पहल से राज्य में पोल्ट्री उद्योग को नई रफ्तार मिलने जा रही है. देश की बड़ी पोल्ट्री कंपनी एबीस ने गया और समस्तीपुर में प्लांट लगाने पर सहमति जताई है. इससे छोटे किसानों, पोल्ट्री फार्म संचालकों और मक्का उगाने वाले किसानों को सीधा फायदा मिलेगा. आने वाले समय में बिहार को पूर्वी भारत के पोल्ट्री हब के रूप में देखा जा सकता है.

छोटे किसानों की सबसे बड़ी परेशानी होगी खत्म

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार के अनुसार, अब तक बिहार के छोटे पोल्ट्री किसानों   (Poultry Farmers ) को सबसे ज्यादा दिक्कत मुर्गी के दाने की बढ़ती कीमत और चूजों की समय पर उपलब्धता को लेकर होती रही है. कई बार बाहर से फीड मंगाने में खर्च बढ़ जाता है, जिससे मुनाफा कम हो जाता है. लेकिन गया और समस्तीपुर में बड़े प्लांट लगने के बाद यह परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी.

स्थानीय स्तर पर फीड बनने से किसानों को सस्ता और आसानी से उपलब्ध दाना मिलेगा. इसके साथ ही चूजों की सप्लाई भी बेहतर होगी. इससे छोटे स्तर पर मुर्गी पालन करने वाले किसानों को बड़ा सहारा मिलेगा. विभाग का मानना है कि इससे पोल्ट्री कारोबार (Poultry Business) की लागत कम होगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी. बिहार सरकार के अनुसार, राज्य में पोल्ट्री की अपार संभावनाएं हैं और यह सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में बड़े निवेश से यह क्षेत्र और मजबूत होगा.

गया और समस्तीपुर में प्लांट से बढ़ेगा निवेश और रोजगार

इस परियोजना को लेकर पहले विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है. अब जल्द ही डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग  और उद्योग विभाग के बीच एक और अहम बैठक होगी. इसमें प्लांट की जमीन, निवेश की राशि और उद्योग नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं पर चर्चा होगी.

फिलहाल कंपनी ने गया और समस्तीपुर में प्लांट लगाने को लेकर सहमति दे दी है. इन दोनों जिलों का चयन रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां से आसपास के जिलों तक सप्लाई आसान होगी. इस प्लांट के लगने से सिर्फ पोल्ट्री कारोबार ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बनेंगे. प्लांट में उत्पादन, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन में बड़ी संख्या में लोगों को काम मिल सकता है. ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

मक्का किसानों को मिलेगा सीधा बाजार

इस पूरी योजना का एक बड़ा फायदा बिहार के मक्का उत्पादक   (Maize producers of Bihar) किसानों को भी मिलने वाला है. पोल्ट्री फीड बनाने में मक्का की बड़ी भूमिका होती है. ऐसे में राज्य में ही बड़े प्लांट लगने से किसानों की फसल का सीधा इस्तेमाल होगा और उन्हें बाहर बाजार ढूंढने की जरूरत कम पड़ेगी.

यहां बायबैक मॉडल (buyback model) पर भी काम किया जाएगा. यानी कंपनी पहले से किसानों या उत्पादकों से तय कीमत पर खरीद की व्यवस्था करेगी. इससे बाजार में दाम घटने-बढ़ने का खतरा कम हो जाएगा. किसानों को पहले से पता रहेगा कि उनका माल किस कीमत पर बिकेगा. इस मॉडल से पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि फीड की कीमतों में अचानक उछाल का असर कम होगा. यानी कारोबार ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगा.

हर महीने लाखों टन फीड की जरूरत

बिहार में हर महीने करीब 1.5 लाख से 2 लाख टन पोल्ट्री फीड की खपत  होती है. अभी मुजफ्फरपुर का बेला औद्योगिक क्षेत्र पोल्ट्री फीड उत्पादन का बड़ा केंद्र है, जहां करीब 35 इकाइयां हर महीने 30 से 40 हजार टन दाना तैयार कर रही हैं. लेकिन राज्य की जरूरत इसके मुकाबले काफी ज्यादा है. नई इकाइयां शुरू होने के बाद बिहार अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खुद पूरा कर सकेगा. इससे राज्य अंडा और चिकन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिशरीज के बाद पशुपालन बिहार (Animal Husbandry Bihar) का सबसे तेजी से बढ़ता सेक्टर बनकर उभरा है. मुर्गी पालन में यहां बड़ी संभावनाएं हैं और नई उद्योग नीति के तहत इस क्षेत्र में बड़े निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है. अगर यह योजना तय समय पर जमीन पर उतरती है, तो आने वाले कुछ वर्षों में बिहार न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करेगा, बल्कि पूर्वी भारत के दूसरे राज्यों को भी पोल्ट्री फीड, अंडा और चिकन की सप्लाई देने वाला बड़ा केंद्र बन सकता है.

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