Rajasthan Horse Breed: राजस्थान की शान और अपनी अनोखी खूबसूरती के लिए मशहूर नुकरा घोड़ा अब वैज्ञानिक पहचान की ओर बढ़ रहा है. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र ने इस खास नस्ल के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके तहत देशभर में मौजूद नुकरा घोड़ों की जानकारी जुटाई जा रही है और उनकी शारीरिक बनावट, रंग, स्वभाव और आनुवंशिक विशेषताओं का अध्ययन किया जा रहा है. अगर यह प्रक्रिया सफल होती है, तो नुकरा घोड़े को देश में एक अलग और आधिकारिक नस्ल के रूप में पहचान मिल जाएगी. इससे इस दुर्लभ नस्ल के संरक्षण और विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
दूधिया सफेद रंग और शाही चाल है नुकरा घोड़े की पहचान
बीकानेर स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र ने मीडिया बातचीत करते हुए कहा कि नुकरा घोड़ा अपनी खूबसूरती और खास पहचान के लिए जाना जाता है. इसका सबसे बड़ा आकर्षण इसका दूधिया सफेद रंग है. इसके अलावा गुलाबी नाक, हल्की आंखें, मजबूत शरीर और तेज चाल इसे दूसरी घोड़ों की नस्लों से अलग बनाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, नुकरा घोड़े की लंबाई सामान्य रूप से 160 से 170 सेंटीमीटर तक होती है. इसके शरीर पर कभी-कभी छोटा काला निशान भी देखने को मिलता है. अपनी आकर्षक बनावट के कारण यह घोड़ा शादियों और खास आयोजनों में भी काफी पसंद किया जाता है.
वैज्ञानिक जुटा रहे हैं नुकरा घोड़ों की पूरी जानकारी
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, बीकानेर की ओर से नुकरा घोड़ों का सर्वे किया जा रहा है. वैज्ञानिक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद इस नस्ल के घोड़ों का डेटा तैयार कर रहे हैं. इस अध्ययन में घोड़ों के रंग, शरीर की बनावट, व्यवहार और आनुवंशिक गुणों की जांच की जा रही है. वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि नुकरा नस्ल की खास विशेषताएं क्या हैं और इसे दूसरी नस्लों से किस तरह अलग पहचाना जा सकता है.
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देशभर में मौजूद हैं करीब 15 हजार नुकरा घोड़े
अनुमान के मुताबिक, देशभर में इस समय करीब 15 हजार नुकरा घोड़े मौजूद हैं. इनमें सबसे ज्यादा संख्या पंजाब में बताई जाती है, जहां लगभग छह हजार नुकरा घोड़े हैं. वहीं राजस्थान में करीब तीन हजार घोड़े पाए जाते हैं. बीकानेर जिले में भी लगभग 200 नुकरा घोड़े मौजूद हैं. राजस्थान में इस नस्ल को सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा जाता है. इसकी खूबसूरती और खास गुणों के कारण घोड़ा पालकों के बीच इसकी मांग बनी हुई है.
संरक्षण और घोड़ा पालकों को मिलेगा फायदा
वैज्ञानिक सर्वे का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब नस्ल पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा. आधिकारिक पहचान मिलने के बाद नुकरा घोड़े के संरक्षण, बेहतर प्रजनन और गुणवत्ता सुधार के लिए नई योजनाएं बनाई जा सकेंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक मान्यता मिलने से इस नस्ल को बचाने में मदद मिलेगी. साथ ही घोड़ा पालकों को भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी. नुकरा घोड़े को पहचान दिलाने की यह पहल सिर्फ एक नस्ल के पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान की परंपरा और विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है.