Today’s Insights: इन 7 आसान तरीकों से बढ़ाएं अपने गाय-भैंस का दूध, किसान भी हो जाएंगे अमीर!

Dairy Farming Tips: भारत में डेयरी फार्मिंग के लिए दूध बढ़ाना सिर्फ नस्ल पर निर्भर नहीं करता. सही खान-पान, संतुलित चारा, पर्याप्त पानी, डीवॉर्मिंग, साफ वातावरण, सही दुहाई का समय और कैल्शियम-विटामिन सप्लीमेंट से दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जा सकती है. किसान कुछ आसान टिप्स को अपनाकर मुनाफा बढ़ा सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 4 Feb, 2026 | 05:06 PM

Dairy Farming: भारत में डेयरी फार्मिंग या पशुपालन एक ऐसा बिजनेस है जो कभी मंदा नहीं होता. सालों से किसान और पशुपालक इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि अच्छी नस्ल के पशु होने के बावजूद दूध का उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ता. असल में दूध देने की क्षमता केवल नस्ल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पशु के खान-पान और सही प्रबंधन पर भी निर्भर करती है. ऐसे में आइए जानते हैं कुछ आसान और प्रभावी तरीके, जिनसे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं.

संतुलित आहार सबसे जरूरी

पशु का दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल हरा चारा देना पर्याप्त नहीं है. संतुलित पशु आहार में खली, चोकर, अनाज और खनिज शामिल होना चाहिए. दुधारू पशुओं को रोजाना 50 ग्राम मिनरल मिक्सचर देना लाभकारी होता है. इससे न केवल दूध की मात्रा बढ़ती है बल्कि प्रजनन क्षमता भी बेहतर होती है.

हरे और सूखे चारे का सही अनुपात

सिर्फ सूखा चारा देने से पाचन कमजोर होता है और इसका असर दूध की मात्रा पर पड़ता है. हमेशा 60% हरा और 40% सूखा चारा देना संतुलित रहता है. हरे चारे में बरसीम, जई और मक्का जैसे विकल्प सबसे अच्छे माने जाते हैं, क्योंकि ये विटामिन और पोषण प्रदान करते हैं.

पर्याप्त साफ पानी

दूध का 85-87% हिस्सा पानी से बनता है. इसलिए कम पानी पीने से दूध की मात्रा घट सकती है. दुधारू पशुओं को दिन में कम से कम 3-4 बार ताजा और साफ पानी पिलाना चाहिए. अगर 24 घंटे पानी उपलब्ध हो तो परिणाम और भी बेहतर होंगे.

पेट के कीड़े मारना (Deworming)

कई बार ज्यादा खाने के बावजूद दूध कम आने का कारण पेट के कीड़े होते हैं. ये कीड़े पोषण को शरीर में अवशोषित नहीं होने देते. हर 3-4 महीने में डीवॉर्मिंग कराना जरूरी है. यह एक सस्ता और प्रभावी तरीका है दूध की मात्रा बढ़ाने का.

आरामदायक और साफ वातावरण

तनावमुक्त पशु ज्यादा दूध देता है. पशुशाला को हवादार, साफ और सूखा रखना चाहिए. गर्मियों में पंखे या फॉगर्स लगाना, सर्दियों में ठंडी हवा से बचाव करना और शोर-शराबे से दूरी बनाए रखना लाभकारी है.

दूध निकालने का सही समय और तरीका

दूध निकालने का समय रोज एक जैसा रखें. सुबह-शाम के शेड्यूल में बदलाव न करें. फिस्ट विधि (Fist Method) अपनाने से थनों को नुकसान नहीं होता और पशु आराम से पूरा दूध देता है. साथ ही दूध की क्वालिटी भी बेहतर होता है.

कैल्शियम और विटामिन्स का सप्लीमेंट

ब्यात के बाद पशु में कैल्शियम की कमी हो सकती है. डॉक्टर की सलाह पर लिक्विड कैल्शियम और विटामिन-H जैसे सप्लीमेंट देना फायदेमंद होता है. इससे दूध की मात्रा और फैट दोनों बढ़ते हैं.

पशुपालन में मुनाफा कमाना मुश्किल काम नहीं है. बस अपने पशुओं के खान-पान, साफ-सफाई और स्वास्थ्य का ध्यान रखें. याद रखें, एक स्वस्थ और खुश पशु ही किसान को अमीर बनाता है.

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