गेहूं के लिए काल बना 4 इंच लंबा ये कीट, केवल रात में करता है हमला.. कुछ ही घंटों में फसल चौपट

ओरिएंटल आर्मीवर्म के विकसित लार्वा लगभग 3 से 4 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. इनका रंग हल्के भूरे से लेकर गहरे काले या मखमली काले तक हो सकता है. शरीर पर गहरी भूरी धारियां और हल्के बाल दिखाई देते हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 20 Jan, 2026 | 02:18 PM

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के गेहूं किसानों के लिए बड़ी खबर है. फसल पर ‘ओरिएंटल आर्मीवर्म’ का खतरा मडरा रहा है. अगर इसका समय पर इलाज नहीं किया गया, तो गेहूं की पैदावार प्रभावित हो सकती है. हालांकि, कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. एडवाइजरी में कहा गया है कि प्रदेश के 28 जिलों में ‘ओरिएंटल आर्मीवर्म’ का प्रकोप देखने को मिल सकता है. इसलिए किसानों को रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज करने शुरू करने के लिए कहा गया है. साथ ही कृषि विभाग ने कुछ जरूर उपाय भी बताए हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओरिएंटल आर्मीवर्म’ करीब चार इंच लंबा एक कीट है, जो फसलों पर तेजी से हमला करता है. इससे फसल की पैदावार  पर असर पड़ता है. यह कीट गुच्छों में अंडे देता है और एक बार में 300 से 700 अंडे तक दे सकता है. यह रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है. इसके लार्वा हजारों की संख्या में सेना की तरह एक खेत से दूसरे खेत में फैलते हैं. इसी वजह से इसे आर्मीवर्म कहा जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह कीट पूरे खेत की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है और कई बार महामारी का रूप लेकर गेहूं की उपज को गंभीर रूप से प्रभावित करता है.

ओरिएंटल आर्मीवर्म की कैसे करें पहचान

ओरिएंटल आर्मीवर्म के विकसित लार्वा लगभग 3 से 4 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. इनका रंग हल्के भूरे से लेकर गहरे काले या मखमली काले तक हो सकता है. शरीर पर गहरी भूरी धारियां और हल्के बाल दिखाई देते हैं. इसका सिर भूरा से नारंगी रंग का होता है, जिस पर अंग्रेजी अक्षर ‘A’ जैसा निशान साफ नजर आता है. यह कीट पौधे के हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है और जड़, तना व पत्तियों पर एक साथ हमला करता है.

बचाव के लिए किसान क्या करें

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस कीट की रोकथाम के लिए किसान कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं. ओरिएंटल आर्मीवर्म शाम 7 बजे से रात 10 बजे के बीच ज्यादा सक्रिय रहता है, इसलिए इस समय लाइट ट्रैप या अलाव जलाकर कीटों को आकर्षित किया जा सकता है. खेत में दिखने वाले अंडों के समूह और लार्वा को हाथ से इकट्ठा कर नष्ट करना भी कारगर उपाय  है. इसके अलावा किसान खेत में पक्षियों के बैठने के लिए लकड़ियों से टी-आकार के आसन बना सकते हैं, जिससे पक्षी लार्वा खाकर कीट के प्राकृतिक नियंत्रण में मदद करेंगे.

इन जिलों में है ज्यादा खतरा

कहा जा रहा है कि बालाघाट, आगर मालवा, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भोपाल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, देवास, धार, हरदा, होशंगाबाद, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नरसिंहपुर, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, सिवनी, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा और पांढुर्ना जिले में इस कीट के हमले की आशंका ज्यादा है. इसलिए इन जिलों के किसानों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है.

 

 

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Published: 20 Jan, 2026 | 02:12 PM

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