गन्ना किसानों के हित में कैबिनेट का बड़ा फैसला, मंजूर की 68.50 रुपये क्विंटल की सीधी सब्सिडी

2025-26 पेराई सीजन में यह 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी निजी चीनी मिलों की ओर से सीधे किसानों को दी जाएगी. पंजाब में गन्ने का SAP पहले ही 416 रुपये प्रति क्विंटल है, जो पिछले साल से 15 रुपये अधिक है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 21 Jan, 2026 | 02:23 PM

Agriculture News: पंजाब सरकार की कैबिनेट ने किसानों के हित में बहुत बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने गन्ना किसानों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है. बैठक में गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सहमत मूल्य (SAP) में से 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सीधी सब्सिडी मंजूर की गई है. इससे पंजाब देश में सबसे अधिक गन्ना मूल्य देने वाला राज्य बना रहेगा. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से राज्य के हजारों गन्ना किसानों को फायदा होगा.

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, 2025-26 पेराई सीजन में यह 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी निजी चीनी मिलों  की ओर से सीधे किसानों को दी जाएगी. पंजाब में गन्ने का SAP पहले ही 416 रुपये प्रति क्विंटल है, जो पिछले साल से 15 रुपये अधिक है. इस फैसले से किसानों की आमदनी और आर्थिक सुरक्षा और मजबूत होगी. वहीं. स्वास्थ्य और फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने ‘सीएम दी योगशाला’ योजना के तहत 1,000 नए योग प्रशिक्षकों के पद सृजित करने को भी मंजूरी दी. इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 35 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया जाएगा, ताकि पंजाब को स्वस्थ और फिट बनाया जा सके.

राज्य सरकार की मंजूरी मिलेगी

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने मुक्तसर के बादल गांव, तरनतारन के खडूर साहिब, जलालाबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फाजिल्का के तृतीयक देखभाल केंद्र  को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS), फरीदकोट को सौंपने की मंजूरी दी. इससे इन इलाकों के लोगों को बेहतर इलाज और आधुनिक जांच सुविधाएं मिल सकेंगी.

कैबिनेट ने पंजाब मैनेजमेंट एंड ट्रांसफर म्युनिसिपल एक्ट, 2020 की धारा 4 के तहत निर्देश तैयार करने और अधिसूचित करने को भी मंजूरी दी. इसका उद्देश्य राज्य सरकार के विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों की नगरपालिकाओं से जुड़ी संपत्तियों को सार्वजनिक उपयोग के लिए ट्रांसफर करना है. इससे विकास कार्यों को गति मिलेगी, भूमि आवंटन में समानता आएगी और सरकारी जमीन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी. भूमि आवंटन की सिफारिश संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति करेगी, जिसे राज्य सरकार की मंजूरी मिलेगी.

31 दिसंबर 2026 तक करने को भी मंजूरी दी

शहरी विकास को तेज करने और भूमि संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए कैबिनेट ने नगर निगम सीमा के भीतर स्थित सभी सरकारी लाइसेंस प्राप्त परियोजनाओं में मौजूद छोड़े गए या चालू रास्तों (रास्ता) और जल निकासी नालों (खाल) को बिक्री या अदला-बदली के जरिए ट्रांसफर करने की नीति को मंजूरी दी. इससे रुकी हुई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और बेहतर शहरी नियोजन में मदद मिलेगी. कैबिनेट ने PAPRA (पंजाब अफोर्डेबल प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट) के तहत लाइसेंस प्राप्त परियोजनाओं की समय-सीमा को एक साल बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक करने को भी मंजूरी दी. यह विस्तार प्रति एकड़ प्रति वर्ष 25,000 रुपये शुल्क पर अधिकतम तीन साल तक दिया जा सकेगा और पहले जैसी शर्तों पर संबंधित प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत किया जाएगा.

 

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Published: 21 Jan, 2026 | 02:17 PM

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