वैश्विक संकट के चलते कच्चे तेल और पेट्रोलियम पदार्थों के साथ ही खाद आयात और स्टॉक को लेकर मौजूद संशय सरकार खत्म करने की कोशिशों में लगी हुई है. लेकिन, दुकानों में खाद होने के बावजूद स्टॉक खत्म होने की जानकारी देने वाले 6802 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं. यह दुकानदार जमाखोरी और कालाबाजारी करने में लिप्त पाए गए हैं. केंद्र के निर्देश पर देशभर में प्रवर्तन एजेंसियों ने 4.66 लाख छापे डाले हैं.
खाद की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिलने और खाद स्टॉक खत्म होने जैसी स्थितियां पैदा करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि उर्वरकों की जमाखोरी, हेराफेरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए कड़े प्रवर्तन उपाय किए हैं. लेकिन, फिर भी ऐसी गतिविधियों में लिफ्त खाद विक्रेताओं, दुकानों और गोदामों पर छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है.
खाद होने के बावजूद स्टॉक खत्म होने की जानकारी देने वालों पर कार्रवाई
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया एस. पटेल ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु घोषित किया गया है और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत अधिसूचित किया गया है जो राज्य सरकारों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर खाद होने के बावजूद दुकानदारों में स्टॉक खत्म होने की जानकारी दी, तय कीमत से ज्यादा दाम में यूरिया के बैग किसानों को बेचे. ऐसे मामलों में कार्रवाई करते हुए लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं.
- Agriculture Budget: कृषि योजनाओं के लिए नहीं बढ़ा बजट, खेती पर खर्च होंगे 1.62 लाख करोड़ रुपये.. पढ़ें डिटेल्स
- Budget 2026: ‘विकसित भारत’ का दावा या जनता को धोखा? बजट पेश होते ही ममता से अखिलेश तक भड़के विपक्षी नेता!
- बजट में रिफॉर्म्स पर फोकस.. ग्रामीण विकास समेत इन सेक्टर्स को बूस्ट देने की घोषणाएं, पढ़ें- कृषि मंत्री ने क्या कहा
6 हजार से ज्यादा लाइसेंस रद्द, 821 लोगों पर एफआईआर दर्ज
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार प्रवर्तन एजेंसियों ने अप्रैल 2025 से अब तक देशभर में 4,66,415 छापे मारे हैं. इनमें से गड़बड़ियां मिलने पर 16,246 दुकानदारों, विक्रेताओं और गोदामों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. जबकि, दोषी पाए गए 6,802 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए हैं और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ 821 एफआईआर दर्ज की गई हैं. विशेष रूप से फरवरी 2026 में जमाखोरी के मामलों में 28 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, दो लाइसेंस निलंबित/रद्द किए गए और दो प्राथमिकी दर्ज की गईं.
उर्वरकों के लिए सब्सिडी आधारित एनबीएस योजना जारी रहेगी
किफायती दामों पर यूरिया की उपलब्धता पक्की करने के लिए यूरिया सब्सिडी योजना के तहत किसानों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है. 45 किलो यूरिया के बैग का एमआरपी 242 रुपये प्रति बैग है (इसमें नीम कोटिंग और लागू करों का शुल्क शामिल नहीं है). खेत में यूरिया की आपूर्ति लागत और यूरिया यूनिटों की ओर से मिलने वाले नेट बाजार मूल्य के बीच का अंतर केंद्र सरकार की ओर से यूरिया निर्माताओं, आयातकों को सब्सिडी के रूप में दिया जा रहा है. केंद्र सरकार ने फॉस्फेट और पोटैशियम (पी एवं के) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना को जारी रखने का फैसला किया है. ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के अनुरूप सब्सिडी दरों को एडजस्ट करके सस्ती दर पर सप्लाई की जा सके.
देश की खाद की मांग कितनी है और स्टॉक कितना है
केंद्रीय उर्वरक विभाग के अनुसार 18 मार्च 2026 तक देश में यूरिया का स्टॉक 439.87 लाख मीट्रिक टन मौजूद है. जबकि, यूरिया खाद की जरूरत किसान को 375.18 लाख मीट्रिक टन है. इस हिसाब से खपत की तुलना में स्टॉक में 65 लाख मीट्रिक टन यूरिया ज्यादा मौजूद है. डीएपी की बात करें तो इस खाद की मांग 109.39 लाख मीट्रिक टन है और स्टॉक में 120.41 लाख मीट्रिक टन मौजूद है. इस हिसाब से जरूरत से लगभग 11 लाख मीट्रिक टन खाद ज्यादा उपलब्ध है. इसी तरह एनपीकेएस खाद का स्टॉक 194.92 लाख मीट्रिक टन है, जबकि मांग इससे 40 लाख मीट्रिक टन कम है. इसी तरह एमओपी भी मांग के अनुरूप 3 लाख मीट्रिक टन अधिक स्टॉक में मौजूद है.