केमिकल-फ्री मूली घर पर ही, जानिए गमले में उगाने का आसान प्रोसेस

मूली की कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं. कुछ किस्में पत्तों के लिए अच्छी होती हैं, तो कुछ कंद के लिए जानी जाती हैं. बीज बोते समय ध्यान रखें कि उन्हें ज्यादा गहराई में न दबाएं. लगभग एक से डेढ़ सेंटीमीटर गहराई में बीज डालना पर्याप्त होता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Dec, 2025 | 02:55 PM

Farming Tips: सर्दियों का मौसम आते ही ताजी सब्जियों की चाह बढ़ जाती है. खासकर मूली, जो सलाद से लेकर सब्जी तक हर रूप में पसंद की जाती है. अगर आपके पास खेत या बाड़ी नहीं है, तब भी परेशान होने की जरूरत नहीं. थोड़ी सी समझदारी और सही देखभाल से आप अपने घर की छत, बालकनी या आंगन में गमले के अंदर ही मूली उगा सकते हैं. यह न सिर्फ आसान है, बल्कि इससे आपको शुद्ध, ताजी और केमिकल-फ्री मूली भी मिलती है.

सही मिट्टी से होती है अच्छी शुरुआत

गमले में मूली उगाने के लिए सबसे जरूरी है मिट्टी की सही तैयारी. इसके लिए मिट्टी को हल्का और भुरभुरा बनाना जरूरी होता है, ताकि कंद अच्छे से बढ़ सके. आमतौर पर मिट्टी को तीन हिस्सों में तैयार किया जाता है. एक हिस्सा सामान्य बगीचे की मिट्टी, दूसरा हिस्सा अच्छी सड़ी हुई गोबर खाद या कंपोस्ट और तीसरा हिस्सा हल्की बालू का रखा जाता है. अगर आपके पास दोमट मिट्टी है, तो उसे गोबर खाद के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. मिट्टी तैयार होने के बाद गमले में भरकर हल्का पानी डाल देना चाहिए.

सही बीज और बुवाई का तरीका

मूली की कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं. कुछ किस्में पत्तों के लिए अच्छी होती हैं, तो कुछ कंद के लिए जानी जाती हैं. बीज बोते समय ध्यान रखें कि उन्हें ज्यादा गहराई में न दबाएं. लगभग एक से डेढ़ सेंटीमीटर गहराई में बीज डालना पर्याप्त होता है. बीज डालने के बाद ऊपर से हल्की मिट्टी डालें और धीरे-धीरे पानी दें, ताकि बीज अपनी जगह से हिले नहीं.

सिंचाई में रखें संतुलन

गमले में उगी मूली को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन नमी बनी रहना जरूरी है. बीज बोने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें. इसके बाद हर 8 से 10 दिन में जरूरत के अनुसार पानी देना काफी होता है. ध्यान रखें कि गमले में पानी जमा न हो, वरना कंद सड़ने का खतरा रहता है.

धूप से मिलेगी ताकत

मूली ठंड के मौसम की फसल है, लेकिन इसे अच्छी बढ़वार के लिए धूप की जरूरत होती है. कोशिश करें कि गमले को ऐसी जगह रखें, जहां रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे धूप मिले. धूप मिलने से पौधा मजबूत बनता है और कंद का आकार भी अच्छा होता है.

बीमारियों से ऐसे रखें बचाव

गमले में मूली उगाने पर आमतौर पर बीमारियां कम लगती हैं. फिर भी अगर पत्तियों पर कीड़े या धब्बे दिखें, तो रासायनिक दवाओं की जगह जैविक उपाय अपनाएं. नीम के तेल का हल्का घोल या हल्दी मिला पानी छिड़कने से कीट दूर रहते हैं और पौधा सुरक्षित रहता है.

डेढ़ महीने में तैयार होती है मूली

मूली की सबसे अच्छी बात यह है कि यह जल्दी तैयार हो जाती है. लगभग 20 से 25 दिनों में आप इसकी हरी पत्तियां और छोटी मूली तोड़कर इस्तेमाल कर सकते हैं. पूरी तरह विकसित कंद के लिए करीब डेढ़ महीने का समय लगता है. इस तरह थोड़ी सी मेहनत से आप पूरे सर्दी के मौसम में घर पर उगाई गई ताजी मूली का स्वाद ले सकते हैं.

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