Hantavirus: कोरोना महामारी की डरावनी यादें अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई हैं कि दुनिया के सामने एक और खतरनाक वायरस ने चिंता बढ़ा दी है. इस बार मामला हंता वायरस (Hantavirus) का है, जिसने अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे एक लग्जरी क्रूज शिप पर हड़कंप मचा दिया. CDC (Centers for Disease Control) के अनुसार, पिछले एक महीने में जहाज पर 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई यात्री और क्रू सदस्य बीमार पाए गए हैं. वहीं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO ) के मुताबिक, शिप पर फैले हंता वायरस के पांच मामले सामने आए हैं, जबकि तीन अन्य मामलों पर अभी शक बना हुआ है.
अब कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और उन लोगों की पहचान की जा रही है, जो इस जहाज से उतरने के बाद अलग-अलग देशों में पहुंचे. विशेषज्ञों का कहना है कि ये वायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलता है और इंसान के फेफड़ों व किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है. राहत की बात यह है कि ये कोरोना की तरह तेजी से इंसानों में नहीं फैलता, लेकिन बंद जगहों पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
क्रूज शिप पर कैसे मचा हड़कंप?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला डच झंडे वाले लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस से जुड़ा है. ये जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया शहर से रवाना हुआ था. यात्रा के दौरान 70 वर्षीय एक डच यात्री को तेज बुखार, सिरदर्द और दस्त की शिकायत हुई. शुरुआत में इसे सामान्य बीमारी माना गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी हालत बिगड़ गई और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. इसके बाद उसकी पत्नी भी बीमार पड़ गई. दक्षिण अफ्रीका पहुंचने के दौरान एयरपोर्ट पर अचानक उसकी मौत हो गई. इसी बीच जहाज पर अन्य यात्री भी बीमार होने लगे. कई लोगों में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी और निमोनिया जैसे लक्षण पाए गए. मई की शुरुआत में जांच रिपोर्ट आने के बाद पहली बार पुष्टि हुई कि जहाज पर हंता वायरस फैल चुका है. इसके बाद WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सक्रिय हो गया और कई देशों ने यात्रियों की निगरानी शुरू कर दी.
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आखिर क्या है हंता वायरस?
हंता वायरस कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन यह बेहद खतरनाक माना जाता है. ये वायरस मुख्य रूप से चूहों में पाया जाता है और उनके मल, मूत्र और लार के जरिए इंसानों तक पहुंचता है. जब संक्रमित चूहों की गंदगी सूखकर धूल में मिल जाती है, तो वायरस हवा में फैल सकता है. अगर कोई व्यक्ति उस संक्रमित हवा में सांस ले ले, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच सकता है. यही वजह है कि पुराने बंद कमरे, गोदाम, स्टोर रूम या गंदे इलाके ज्यादा जोखिम वाले माने जाते हैं. ये वायरस शरीर में पहुंचकर फेफड़ों और किडनी पर हमला करता है. गंभीर मामलों में मरीज को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगती है और ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिर सकता है.
हंता वायरस के लक्षण क्यों हैं खतरनाक?
हंता वायरस की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि इसके शुरुआती लक्षण बिल्कुल सामान्य फ्लू जैसे होते हैं. यही कारण है कि लोग शुरुआत में इसे हल्के में ले लेते हैं. शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और कमजोरी शामिल हैं. कई मरीजों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द भी होता है. लेकिन कुछ दिनों बाद स्थिति अचानक गंभीर हो सकती है. मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, सीने में भारीपन महसूस होता है और फेफड़ों में पानी भर सकता है. गंभीर स्थिति में मरीज को ICU और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है.
क्या ये वायरस कोरोना की तरह फैल सकता है?
फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि हंता वायरस सामान्य रूप से इंसान से इंसान में नहीं फैलता. यह मुख्य रूप से चूहों और उनके संक्रमित वातावरण के संपर्क से फैलता है. हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में इसके अलग स्ट्रेन में इंसान से इंसान में संक्रमण की संभावना देखी गई है. क्रूज शिप के मामले में भी इसी वजह से स्वास्थ्य एजेंसियां ज्यादा सतर्क हैं, क्योंकि जहाज जैसी बंद जगह में लोग लंबे समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं. सबसे बड़ी चिंता यह है कि जहाज पर मौजूद लोग कई देशों में यात्रा कर चुके हैं. ऐसे में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग यानी संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने का काम तेजी से किया जा रहा है.
बचाव ही सबसे बड़ा हथियार
फिलहाल हंता वायरस का कोई खास इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. मरीजों को अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट, ICU और जरूरी मेडिकल केयर दी जाती है. इसलिए बचाव सबसे जरूरी माना जा रहा है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर और आसपास सफाई रखें, चूहों को घर में आने से रोकें और खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें. पुराने कमरों या गोदामों की सफाई करते समय मास्क और दस्ताने जरूर पहनें. अगर किसी जगह चूहों का मल दिखाई दे, तो उस पर सीधे झाड़ू न लगाएं. पहले कीटाणुनाशक का छिड़काव करें ताकि संक्रमित धूल हवा में न फैले. अगर किसी व्यक्ति को चूहों वाले इलाके में जाने के बाद तेज बुखार, शरीर दर्द और सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सही समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है.