CWC report: देश में गर्मी बढ़ने के साथ पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता भी बढ़ने लगी है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घटा है और अब कुल क्षमता का सिर्फ 47 फीसदी ही पानी बचा है. केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 166 बड़े जलाशयों में 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) क्षमता के मुकाबले केवल 85.698 BCM पानी मौजूद है.
यह स्थिति संकेत दे रही है कि अगर समय रहते बारिश नहीं हुई या पानी का सही प्रबंधन नहीं किया गया, तो आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है.
आधे से ज्यादा जलाशय खाली होने की स्थिति में
सबसे बड़ी चिंता यह है कि देश के आधे से ज्यादा जलाशय आधे से भी कम भरे हुए हैं. पांच में से तीन क्षेत्रों में जल स्तर 50 फीसदी से नीचे चला गया है. इसका असर खेती, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है. जलाशयों में लगातार गिरता स्तर यह दिखाता है कि पानी की खपत ज्यादा हो रही है, लेकिन उसकी भरपाई बारिश से नहीं हो पा रही है.
बारिश की कमी बनी बड़ी वजह
IMD के अनुसार, 1 मार्च के बाद से देश के 725 जिलों में से करीब 35 फीसदी जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है. इसके अलावा जनवरी और फरवरी के दौरान 70 फीसदी से अधिक हिस्सों में सर्दियों की बारिश या तो बहुत कम हुई या बिल्कुल नहीं हुई. यही कारण है कि जलाशयों में पानी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है.
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा असर
दक्षिण भारत की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है. यहां 47 जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 36 फीसदी पानी ही बचा है, जो पिछले साल से भी कम है. तेलंगाना में स्थिति सबसे कमजोर है, जहां केवल 28.67 फीसदी जल भंडारण है. हालांकि यह पिछले साल के 20 फीसदी से थोड़ा बेहतर है.
तमिलनाडु में 43.5 फीसदी जल स्तर है, जबकि आंध्र प्रदेश में 41 फीसदी, कर्नाटक में 35 फीसदी और केरल में 38 फीसदी भंडारण दर्ज किया गया है.
पूर्वी भारत में भी स्थिति कमजोर
पूर्वी भारत में भी जलाशयों की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है. यहां 27 जलाशयों में कुल भंडारण 45 फीसदी से कम है.
असम में केवल 17 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 20 फीसदी पानी बचा है, जो काफी कम है. वहीं मेघालय और त्रिपुरा में स्थिति बेहतर है, जहां जलाशय क्रमशः 85 फीसदी और 60 फीसदी तक भरे हैं.
झारखंड में 59 फीसदी, ओडिशा में 46 फीसदी और बिहार में 35 फीसदी जल स्तर दर्ज किया गया है.
उत्तर भारत में थोड़ी राहत
उत्तर भारत में जलाशयों की स्थिति पिछले साल के मुकाबले बेहतर है. यहां 11 जलाशयों में 44 फीसदी पानी मौजूद है, जो पिछले साल से लगभग दोगुना है.
पंजाब में 49 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 37 फीसदी और राजस्थान में 52.5 फीसदी जल भंडारण दर्ज किया गया है.
पश्चिम और मध्य भारत की स्थिति बेहतर
पश्चिमी भारत में जल स्तर सबसे बेहतर है. यहां जलाशय 56 फीसदी तक भरे हैं. गुजरात में 59 फीसदी, महाराष्ट्र में 53 फीसदी और गोवा में 52 फीसदी पानी मौजूद है.
मध्य भारत में भी स्थिति संतुलित है. यहां कुल जल स्तर 53 फीसदी है. छत्तीसगढ़ में 67 फीसदी, मध्य प्रदेश में 55 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 48 फीसदी और उत्तराखंड में 38 फीसदी पानी दर्ज किया गया है.
आगे क्या है स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जलाशयों का स्तर और गिर सकता है. हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के कारण कुछ क्षेत्रों में बारिश की संभावना है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है. लेकिन अगर यह बारिश पर्याप्त नहीं हुई, तो गर्मियों के दौरान पानी की कमी गंभीर रूप ले सकती है.
किसानों और आम लोगों पर असर
जलाशयों में पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है. सिंचाई के लिए पानी कम मिलेगा, जिससे फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. शहरों में भी पानी की सप्लाई पर असर पड़ सकता है और बिजली उत्पादन में भी कमी आ सकती है, क्योंकि कई पावर प्लांट जलाशयों के पानी पर निर्भर होते हैं.