वैज्ञानिकों ने तैयार की कद्दू की नई किस्म, मार्च में बुवाई करने पर होगी बंपर पैदावार.. बस करें ये काम

‘राजेंद्र चमत्कार’ कद्दू की खेती फरवरी से मार्च के बीच की जा सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म ज्यादा उत्पादन देने के लिए मशहूर है. इसके लिए प्रति हेक्टेयर 3-4 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. ऐसे भी बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले कद्दू की मांग हमेशा रहती है, जिससे किसानों को अच्छा मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 24 Feb, 2026 | 04:04 PM

Pumpkin Farming: अगले महीने यानी मार्च से गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी. इसके बाद किसान सब्जियों की बुवाई करेंगे. लेकिन कई ऐसे किसान हैं, जो अभी असमंजस में हैं. वे फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि कौन सी बागवानी फसल की बुवाई की जाए, ताकि फसल कम समय में तैयार हो जाए. साथ ही कमाई भी बंपर हो. लेकिन अब ऐसे किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने फरवरी- मार्च के दौरान किसानों को कद्दू फसल की बुवाई करने की सलाह दी है. इस फसल से किसानों की अच्छी कमाई होगी, क्योंकि इस सब्जी की मांग मार्केट में पूरे साल रहती है.

दरअसल, फरवरी-मार्च का महीना बागवानी के लिए बहुत ही बेहतर माना गया है. इन दो महीने के दौरान किसान अलग-अलग ग्रीष्मकालीन सब्जियों की बुवाई करते हैं. खासतौर पर सब्जी उगाने वाले किसान इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि कौन सी किस्म लगाई जाए, जिससे अच्छी पैदावार हो और बाजार में बढ़िया कीमत मिले, ताकि मुनाफा भी दोगुना हो जाए.

पैदावार और मुनाफा दोनों में होगी बढ़ोतरी

अक्सर जानकारी की कमी के कारण किसान पारंपरिक या कम उत्पादक किस्में चुन लेते हैं, जिसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ता है. ऐसे में अनुसंधान आधारित उन्नत बीज चुनना जरूरी हो जाता है. अगर किसान सही समय पर बुवाई करें और आधुनिक तकनीक अपनाएं, तो पैदावार और मुनाफा दोनों बढ़ाया जा सकता है. इसी कड़ी में  डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने एक खास कद्दू की नई किस्म  विकसित की है, जो किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे द्वारा विकसित की गई ‘राजेंद्र चमत्कार’ कद्दू की खेती फरवरी से मार्च के बीच की जा सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म ज्यादा उत्पादन देने के लिए मशहूर है. इसके लिए प्रति हेक्टेयर 3-4 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है.

किसान सही दूरी और संतुलित खाद प्रबंधन के साथ खेती करते हैं, तो यह फसल 25-30 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है. इसके फलों का औसत वजन 1 किलो से ज्यादा होता है और आकार व रंग आकर्षक होने की वजह से बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है. यही कारण है कि यह किस्म किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा  देने वाली साबित हो सकती है.

फरवरी- मार्च के दौरान कर सकते हैं बुवाई

वहीं, किसानों के लिए जरूरी है कि वे फरवरी- मार्च के अनुकूल मौसम का फायदा उठाकर समय पर बुवाई करें. खेत की अच्छी तैयारी करें, गोबर की सड़ी खाद का इस्तेमाल करें और संतुलित उर्वरक  व समय-समय पर सिंचाई करें. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान विश्वविद्यालय के प्रमाणित बीज का उपयोग करें और सुझाई गई तकनीक अपनाएं, तो उन्हें बेहतर पैदावार और अधिक आय मिल सकती है.

गुणवत्ता वाले कद्दू की मांग हमेशा रहती है

बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले कद्दू की मांग हमेशा रहती है, जिससे किसानों को अच्छा मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में ‘राजेंद्र चमत्कार’ कद्दू की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का असरदार और भरोसेमंद विकल्प बन सकती है. सही जानकारी, वैज्ञानिक सलाह और समय पर बुवाई से यह किस्म सच में किसानों के लिए ‘चमत्कार’ साबित हो सकती है.

कद्दू की सब्जी खाने के फायदे

कद्दू एक बेहद पौष्टिक और फायदेमंद सब्जी है. इसे खाने से पाचन तंत्र सही रहता है, वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है, शरीर को ठंडक मिलती है और दिल की सेहत बेहतर होती है. इसमें लगभग 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी, भरपूर फाइबर और बहुत कम कैलोरी होती है. यही वजह है कि यह मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है.

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Published: 24 Feb, 2026 | 04:04 PM

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