जमीन अधिकारों को लेकर महाराष्ट्र में किसानों का बवाल, भोजन-बिस्तर लेकर निकले.. सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया

हजारों की संख्या में आदिवासी और किसानों की अधिकारों की मांग को लेकर निकले अन्नादाताओं की हुंकार से सरकार ने बातचीत के लिए बुला लिया है. किसानों ने मुंबई पहुंचने का ऐलान किया है. प्रदर्शनकारियों ने लाल झंडे लेकर निकले और उनका नेतृत्व CPI(M) से जुड़े अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) कर रही है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 27 Jan, 2026 | 02:24 PM

जमीन अधिकारों के साथ ही विभिन्न मांगों को लेकर नासिक से मुंबई के लिए 25 जनवरी को निकले किसानों की हुंकार से शासन-प्रशासन के हाथ पैर फूल गए हैं. महाराष्ट्र के किसानों ने अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए कई दिनों के लिए भोजन, बिस्तर समेत अन्य जरूरी सामान लेकर निकले हैं. किसानों ने 60 किलोमीटर तक पैदल मार्च किया. किसानों की हुंकार से सरकार बैकफुट पर आ गई है और आंदोलन से जुड़े लोगों का प्रतिनिधिमंडल को को प्रदर्शन के तीसरे दिन बातचीत के लिए न्यौता भेजा है.

हजारों की संख्या में आदिवासी और किसानों की अधिकारों की मांग को लेकर निकले अन्नादाताओं की हुंकार से सरकार ने बातचीत के लिए बुला लिया है. किसान और आदिवासी नासिक से मुंबई की ओर जमीन के अधिकारों और अन्य मांगों को लेकर मार्च कर रहे थे. किसानों ने मुंबई पहुंचने का ऐलान किया है. प्रदर्शनकारियों ने लाल झंडे लेकर निकले और उनका नेतृत्व CPI(M) से जुड़े अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) कर रही है.

किसानों के लॉन्ग मार्च का तीसरा दिन

पूर्व विधायक जे पी गावित ने मीडिया से कहा कि रविवार को ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू किया गया था, तब नासिक जिले के डिंडोरी तहसील कार्यालय के बाहर किया गया आंदोलन कोई ठोस आश्वासन दिलाने में विफल रहा. इसके बाद उन्होंने पैदल मुंबई तक मार्च करके अपनी मांगों को सीधे राज्य सरकार तक पहुंचाने का फैसला किया. उन्होंने अपने विरोध प्रदर्शन की अवधि के लिए भोजन, अनाज, जलाऊ लकड़ी और अन्य आवश्यक सामानों की भी व्यवस्था की है.

किसानों की हुंकार के बाद बैकफुट पर सरकार, बातचीत के लिए बुलाया

मार्च करने वालों में बड़ी संख्या में किसान शामिल थे, जिन्होंने पिछले दो दिनों में लगभग 60 किमी की दूरी तय की और मंगलवार सुबह कसारा घाट से नीचे उतरना शुरू किया. गावित ने बताया कि वे अब नासिक से निकलकर पड़ोसी ठाणे जिले में प्रवेश कर चुके हैं. उन्होंने दावा किया कि लगातार लामबंदी और मीडिया में मार्च के प्रचार के कारण राज्य सरकार ने मंगलवार को मुंबई में मंत्रालय (सचिवालय) में बातचीत के लिए प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया.

गावित ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल में वह खुद, CPI (M) पोलित ब्यूरो सदस्य और AIKS के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले, किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव अजीत नवाले और विधायक विनोद निकोले शामिल होंगे, जो मुख्यमंत्री और अन्य संबंधित मंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे.

इन मांगों के लिए आंदोलन कर रहे किसान

उन्होंने कहा “पेठ, सुरगाणा, कलवण और त्र्यंबकेश्वर तालुकों के आदिवासी किसान जमीन के अधिकारों, सिंचाई और वन दावों से संबंधित अनसुलझे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए आंदोलन में भाग ले रहे हैं. ये क्षेत्र सूखाग्रस्त हैं और किसान स्थानीय कृषि के लिए सिंचाई का पानी सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों और उनकी सहायक नदियों पर बड़े चेक डैम बनाने की मांग कर रहे हैं. गावित ने कहा कि प्रदर्शनकारी चार हेक्टेयर तक अतिक्रमित भूमि पर खेती को नियमित करने, भूमि रिकॉर्ड जारी करने, खारिज किए गए वन अधिकार दावों की फिर से जांच करने और वन भूमि धारकों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज की खरीद की भी मांग कर रहे हैं.

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