Karnataka budget 2026: कर्नाटक सरकार ने राज्य के मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं. वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मछुआरों की आय बढ़ाने, मत्स्य कारोबार को आधुनिक बनाने और बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया. सरकार का मानना है कि अगर मत्स्य क्षेत्र को बेहतर सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और मजबूत बाजार व्यवस्था मिले तो इससे लाखों लोगों की आजीविका मजबूत हो सकती है.
कर्नाटक के तटीय इलाकों के साथ-साथ राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोग मछली पालन से जुड़े हुए हैं. ऐसे में इस क्षेत्र के विकास को राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कई जिलों में बनेंगे नए फिश मार्केट
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट पेश करते हुए बताया कि राज्य के कई जिलों में आधुनिक मछली बाजारों की कमी महसूस की जा रही थी. इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने उत्तर कन्नड़, दक्षिण कन्नड़, उडुपी और बागलकोट जिलों में नए फिश मार्केट बनाने का फैसला किया है.
इन बाजारों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि मछलियों की साफ-सफाई, भंडारण और बिक्री बेहतर तरीके से हो सके. इससे मछुआरों को अपनी पकड़ सीधे बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी और उपभोक्ताओं को भी ताजा और साफ मछली उत्पाद मिल सकेंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक फिश मार्केट बनने से मछली कारोबार में पारदर्शिता और बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.
‘मत्स्य दर्शिनी’ केंद्रों की होगी स्थापना
राज्य सरकार मछली के उपभोग को बढ़ावा देने और लोगों तक अच्छी गुणवत्ता की मछली पहुंचाने के लिए ‘मत्स्य दर्शिनी’ केंद्र भी स्थापित करेगी. यह केंद्र बेलगावी, दावणगेरे, हुबली और चिकमंगलुरु जिलों में खोले जाएंगे. इन केंद्रों के जरिए लोगों को साफ-सुथरे और सुरक्षित तरीके से तैयार किए गए मछली उत्पाद मिलेंगे. इससे मछुआरों को भी अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर मंच मिलेगा और बाजार का विस्तार होगा.
मंगलुरु में बनेगा मत्स्य क्षेत्र का उत्कृष्टता केंद्र
सरकार ने मत्स्य क्षेत्र में शोध और नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए मंगलुरु के फिशरीज कॉलेज में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने की घोषणा की है. इस केंद्र में जैव प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, नई तकनीकों के विकास और समुद्री खेती यानी मैरिकल्चर को बढ़ाने पर काम किया जाएगा. यहां शोध, प्रशिक्षण और तकनीकी विकास से जुड़ी गतिविधियां भी चलेंगी, जिससे मत्स्य पालन को अधिक आधुनिक और लाभदायक बनाया जा सकेगा.
मछुआरों को मिलने वाली किट की राशि दोगुनी
मछुआरों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है. पहले मछुआरों को जो मुफ्त किट दी जाती थी उसकी कीमत 10 हजार रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है.
इस किट में मछली पकड़ने और उससे जुड़े कार्यों के लिए जरूरी उपकरण शामिल होते हैं. किट की राशि बढ़ने से मछुआरों को बेहतर उपकरण मिलेंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और उत्पादन में भी सुधार होगा.
मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों की सड़कों के लिए 20 करोड़ रुपये
सरकार ने मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों से जुड़ी सड़कों के रखरखाव के लिए भी 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इन सड़कों को बेहतर बनाने से मछुआरे अपनी पकड़ को जल्दी और सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचा सकेंगे. बेहतर सड़क व्यवस्था से परिवहन में लगने वाला समय कम होगा और मछली खराब होने की समस्या भी कम होगी.
अंतर्देशीय मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की योजना
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि नदियों, झीलों, तालाबों और जलाशयों में होने वाला अंतर्देशीय मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. सरकार मछुआरों को आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देगी ताकि वे इन जल स्रोतों में मछली उत्पादन बढ़ा सकें और अपनी आय को स्थिर बना सकें.
सुपारी और नारियल फसलों के रोग नियंत्रण पर भी ध्यान
बजट में राज्य की अन्य महत्वपूर्ण फसलों को भी ध्यान में रखा गया है. मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक में सुपारी और नारियल की फसलों में फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा.
इसके लिए कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के सहयोग से सामुदायिक स्तर पर रोग नियंत्रण कार्यक्रम चलाए जाएंगे. सुपारी में होने वाली लीफ स्पॉट, येलो लीफ और विल्ट जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के साथ-साथ नारियल में लगने वाले ब्लैक-हेडेड कैटरपिलर और व्हाइट फ्लाई जैसे कीटों से भी बचाव के उपाय किए जाएंगे.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा घोषित इन योजनाओं से कर्नाटक के मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी. बेहतर बाजार, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण की सुविधाओं से मछुआरों की आय बढ़ने की संभावना है. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी इससे सकारात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है.