खेती में तेजी से यंत्रों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. खुद सरकार भी किसानों को कृषि यंत्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है और इसके लिए कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाएं चला रही है. अब किसान भी यंत्रों का इस्तेमाल कर अपना समय और खर्च बचा रहे हैं. ऐसे ही गाजर किसान राजेश कुमार ने अपनी गाजर की धुलाई के लिए मशीन का इस्तेमाल किया है और जिस धुलाई में उन्हें पहले 1 घंटे से ज्यादा समय लगता था अब वह काम केवल 10 मिनट में हो जा रहा है. मशीन के इस्तेमाल से गाजर चमकदार निकलती है, जिससे बाजार में उसका भाव भी अच्छा मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
दो एकड़ गाजर की धुलाई के लिए तकनीक का इस्तेमाल
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के रहने वाले राजेश कुमार खेती करते हैं. इस बार उन्होंने दो एकड़ जमीन पर गाजर की फसल भी लगाई है. गाजर किसान राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने गाजर कटाई के बाद बिक्री के लिए उसकी सफाई करते हैं और इस बार वह धुलाई मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे तुरंत बिक्री के लिए उनकी उपज बाजार में पहुंचाने के दौरान ताजगीभरी बनी रहती हैं. इससे उन्हें भाव ठीक मिल जाता है.
मैकेनिकल गाजर धुलाई मशीन का इस्तेमाल कर रहे किसान
गाजर की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाली मैकेनिकल गाजर धुलाई मशीन (Carrot Washing Machine) है. इस मशीन में गाजरों को एक घूर्णन ड्रम या ब्रश सिस्टम के भीतर डाला जाता है, जहां पानी के तेज प्रवाह और रबर या नायलॉन ब्रश की मदद से गाजर पर लगी मिट्टी, कीचड़ और अन्य अशुद्धियां पूरी तरह साफ हो जाती हैं. यह मशीन खास तौर पर सब्जी मंडी, एफपीओ, प्रोसेसिंग यूनिट और बड़े किसानों के लिए उपयोगी होती है, जहां बड़ी मात्रा में गाजर की धुलाई कम समय में करनी होती है.
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कई घंटों का काम 10 मिनट में निपट रहा
राजेश कुमार ने बताया कि गाजर धुलाई मशीन खरीदी है. इससे धुलाई करना आसान होता है और कई घंटों का काम 10 मिनट में निपट जाता है. उन्होंने कहा कि यह गाजर मशीन एक बार में एक क्विंटल तक गाजर की धुलाई करती है. उन्होंने कहा कि गाजर धुलाई मशीन गोल बेलनाकार होती है, जिसमें गाजर डाल दी जाती है और उसे इंजन के जरिए चलाया जाता है. उन्होंने कहा कि मशीन को मैनुअल भी इस्तेमाल में लिया जा सकता है. गाजर सफाई के दौरान पानी मशीन के ऊपर से डालना होता है. और बेलनाकार मशीन घूमती है तो गाजर की मिट्टी या खराब गाजर साफ हो जाती है.
धुलकर चमकदार निकलती है गाजर, अच्छा भाव मिलता है
इस गाजर धुलाई मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में बड़ी मात्रा में गाजर साफ कर देती है. मशीन से धुलाई करने पर गाजर की सतह को नुकसान नहीं होता और उनकी प्राकृतिक चमक बनी रहती है. पानी की खपत नियंत्रित रहती है और श्रम लागत भी काफी कम हो जाती है. मशीन चलाने में आसान होती है और एक समान गुणवत्ता की साफ गाजर तैयार होती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
15 हजार रुपये की मिल रही मशीन, योजना से सब्सिडी का लाभ भी लें
किसान राजेश कुमार ने बताया कि वह जो गाजर धुलाई मशीन इस्तेमाल कर रहे हैं उसे उन्होंने 15 हजार रुपये में खरीदा है. उन्होंने कहा कि 20 हजार रुपये तक में बड़ी मशीन मिल जाती है. कई राज्यों में कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत इस तरह की मशीनों पर सब्सिडी का प्रावधान भी मिलता है, जिससे किसानों पर लागत का बोझ कम हो जाता है. किसान उत्तर प्रदेश सरकार की एग्रीकल्चर विभाग के पोर्टल पर जाकर सब्सिडी के लिए आवेदन भी कर सकते हैं.