India tractor sales: भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए साल 2025 कई मायनों में खास साबित हुआ. खेती-किसानी से जुड़ा सबसे अहम उपकरण माने जाने वाले ट्रैक्टर की बिक्री ने इस साल नया मुकाम छू लिया. देशभर में ट्रैक्टरों की रिटेल बिक्री करीब 10 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और किसानों के बढ़ते भरोसे को साफ दिखाती है. उद्योग से जुड़े अधिकारियों और विश्लेषकों का मानना है कि यही रफ्तार 2026 में भी बनी रह सकती है.
रिटेल बिक्री में दो अंकों की बढ़ोतरी
ऑटोमोबाइल डीलर्स के संगठन फाडा के रिसर्च आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में ट्रैक्टरों की कुल रिटेल बिक्री 9,96,633 यूनिट रही. यह आंकड़ा 2024 में बिके 8,93,706 ट्रैक्टरों के मुकाबले 11 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी को दर्शाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी मानसून स्थिति, फसलों के बेहतर दाम और गांवों में नकदी प्रवाह बढ़ने से ट्रैक्टर की मांग को मजबूती मिली.
महिंद्रा और स्वराज का दबदबा और मजबूत
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैक्टर उद्योग में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 2025 में अपना दबदबा और बढ़ा लिया. कंपनी ने सालभर में 2,37,980 ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री की और उसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 23.88 प्रतिशत हो गई. एक साल पहले यह हिस्सा 23.36 प्रतिशत था.
महिंद्रा के स्वामित्व वाला स्वराज ट्रैक्टर्स ब्रांड भी पीछे नहीं रहा. स्वराज ने 1,86,529 ट्रैक्टर बेचे और इसकी बाजार हिस्सेदारी 18.72 प्रतिशत तक पहुंच गई. महिंद्रा और स्वराज दोनों को मिलाकर देखा जाए, तो इन दो ब्रांडों का कुल उद्योग बिक्री में योगदान 42 प्रतिशत से भी ज्यादा रहा, जो इनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है.
अन्य कंपनियों की स्थिति भी रही मजबूत
महिंद्रा समूह के बाद सोनालिका ट्रैक्टर्स तीसरे स्थान पर रही. कंपनी ने 1,26,741 ट्रैक्टर बेचे, हालांकि इसकी बाजार हिस्सेदारी थोड़ी घटकर 12.72 प्रतिशत रह गई. टैफे ने 1,11,947 यूनिट की बिक्री की और उसकी हिस्सेदारी 11.23 प्रतिशत रही.
वहीं एस्कॉर्ट्स कुबोटा के लिए 2025 काफी खास रहा. कंपनी ने अपनी बिक्री बढ़ाकर 1,06,482 यूनिट कर ली और बाजार हिस्सेदारी 9.78 प्रतिशत से बढ़कर 10.68 प्रतिशत तक पहुंचा दी.
जॉन डीरे इंडिया ने 76,563 ट्रैक्टर बेचे और 7.68 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की, जबकि आयशर ट्रैक्टर्स ने 61,768 यूनिट की बिक्री दर्ज की.
साल के आखिर में मांग ने पकड़ी रफ्तार
महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष विजय नाकरा के अनुसार, साल 2025 के आखिरी महीनों में मांग में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में कंपनी ने घरेलू बाजार में 30,210 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 37 प्रतिशत ज्यादा है. इससे यह साफ होता है कि किसानों का भरोसा साल के अंत तक और मजबूत हुआ.
2026 को लेकर क्यों हैं उम्मीदें मजबूत
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी ट्रैक्टर बाजार की रफ्तार बनी रह सकती है. प्राइमस पार्टनर्स के एडवाइजर अनुराग सिंह का कहना है कि रबी फसल का आउटलुक फिलहाल सकारात्मक नजर आ रहा है. मौसम की स्थिति अनुकूल है और कृषि जिंसों के दाम भी स्थिर बने हुए हैं. इसका सीधा फायदा किसानों की आय पर पड़ेगा, जिससे वे खेती से जुड़े निवेश, खासकर ट्रैक्टर जैसी मशीनरी पर खर्च करने के लिए प्रेरित होंगे.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आईना है ट्रैक्टर बिक्री
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैक्टर की बिक्री को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पैमाना माना जाता है. जब किसान ट्रैक्टर खरीदते हैं, तो यह संकेत होता है कि उनकी आय में स्थिरता है और भविष्य को लेकर भरोसा भी है. 2025 के आंकड़े इसी भरोसे की कहानी कहते हैं.
अगर मौसम और फसल की स्थिति इसी तरह अनुकूल बनी रही, तो 2026 में भी ट्रैक्टर उद्योग के लिए मजबूत मांग देखने को मिल सकती है. इससे न सिर्फ कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार और कृषि उत्पादकता को भी नया बल मिलेगा.