सरकार ने गठित की केंद्रीय टीम.. हिमाचल, उत्तराखंड और पंजाब में बारिश से हुई तबाही का लेगी जायजा

उत्तर भारत में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच केंद्र सरकार ने हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी टीमों का गठन किया है. राहत कार्यों में NDRF, सेना और वायुसेना की टीमें जुटी हुई हैं.

नोएडा | Published: 31 Aug, 2025 | 10:29 PM

पिछले एक महीने से उत्तरी भारत में लगातार हो रही भारी बारिश, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने रविवार को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों (IMCTs) का गठन किया है. इन टीमों का काम बाढ़, भूस्खलन और भारी बारिश से हुए नुकसान का जायजा लेना है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, ये टीमें अगले हफ्ते की शुरुआत में प्रभावित जिलों का दौरा करेंगी. इससे पहले भी एक अंतर-मंत्रालयी और एक बहु-क्षेत्रीय टीम हिमाचल प्रदेश का दौरा कर चुकी है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, टीमें मौके पर जाकर स्थिति का आकलन करेंगी और राज्य सरकारों द्वारा किए गए राहत कार्यों की समीक्षा भी करेंगी. हर टीम का नेतृत्व गृह मंत्रालय (MHA) या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के संयुक्त सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे. इसके अलावा, टीमों में व्यय विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण, जल शक्ति, विद्युत, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे.

राहत और बचाव कार्य जारी

सरकारी सूत्रों ने आगे जानकारी दी कि गृह मंत्रालय (MHA) इन राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में है और सभी जरूरी लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध करा रहा है. इसके तहत जरूरत के हिसाब से NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल), सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की टीमें तैनात की गई हैं, जो राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ जरूरी सेवाओं की बहाली में मदद कर रही हैं.

रावी नदी में 14.11 लाख क्यूसेक पानी

वहीं, पंजाब में बाढ़ की स्थिति रविवार को और बिगड़ गई जब कई जिलों में लगातार बारिश होती रही और घग्गर और ब्यास नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया. चार दिन पहले रावी नदी में 14.11 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था, जो अब अमृतसर के अजनाला की ओर बह रहा है. इससे अजनाला शहर के कई हिस्से और 15 गांव पानी में डूब गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात तब तक नहीं सुधरेंगे जब तक यह पानी पाकिस्तान की ओर बहना शुरू नहीं करता.

1,000 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में

अजनाला से विधायक कुलदीप ढींडसा ने कहा है कि उनका पूरा क्षेत्र, जो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित है, बाढ़ से बुरी तरह तबाह हो गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को तुरंत पंजाब की मदद करनी चाहिए. अब तक बाढ़ के कारण 26 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सिंचाई विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल है, जो पिछले हफ्ते मढ़ोपुर बैराज पर फ्लड गेट खोलते समय रावी नदी में गिर गया था. बाढ़ का असर 1,000 से ज्यादा गांवों में देखा गया है, जिसकी वजह नदियों का उफान और बांधों से नियंत्रित रूप से छोड़ा गया पानी है.रविवार सुबह एक बार फिर बारिश के कारण ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ गया. सुल्तानपुर लोधी के पास धिलवां में जल प्रवाह 2.35 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया. इसकी वजह चक्की डैम से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी है.