अंडे की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे का क्या है राज, पोल्ट्री से ग्राहकों तक आते-आते कैसे हो जाता है महंगा

पोल्ट्री कारोबार में उत्पादन बढ़ाने के लिए कई हफ्तों की तैयारी लगती है. पिछले कुछ सालों में दामों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, इसलिए किसान जल्दी या ज्यादा जोखिम लेने से बच रहे हैं. इसी वजह से उत्पादन में सुधार तो हुआ है, लेकिन इतना नहीं कि कीमतें तेजी से नीचे आ सकें.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 26 Dec, 2025 | 12:15 PM

Egg Price Hike: सर्दी के मौसम आते ही अंडे महंगे हो जाते हैं, लेकिन आमतौर पर इसके ऊपर ज्यादा दिनों तक चर्चा में नहीं होती. अभी देश के कई शहरों में अंडा 8 रुपये या उससे ज्यादा में बिक रहा है. ऐसे में आम जनता है के किचन का बजट बिगड़ गया है. हालांकि, लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही कीमतों में गिरावट आएगी. पर व्यापारियों का कहना है कि सर्दी के मौसम तक अंडे की कीमत में गिरावट की बहुत कम ही उम्मीद है. तो आइये आज जानते हैं सर्दी के मौसम आते ही अंडा क्यों महंगा हो जाता है.

दरअसल, अंडों की खपत हर साल दिसंबर- जनवरी में सबसे ज्यादा होती है. ठंड के मौसम में लोग ज्यादा प्रोटीन वाला खाना खाते हैं. स्कूल हॉस्टल, ठेले- ढाबे, और घरों में अंडों की मांग  बढ़ जाती है. बड़े खरीदार भी इसी समय ज्यादा खरीदारी करते हैं. आमतौर पर यह मांग जनवरी के आखिर तक बनी रहती है. अक्सर फरवरी से, जब मौसम गर्म होने लगता है, तब अंडों की खपत और कीमतें धीरे-धीरे कम होती हैं. इस साल भी पैटर्न वही है, लेकिन फर्क यह है कि कीमतें पहले से ही काफी ऊंचे स्तर पर हैं.

कब सस्ता होगा अंडा

हालांकि अंडों की सप्लाई पिछले साल से बेहतर है, फिर भी यह बढ़ी हुई मांग के मुकाबले कम पड़ रही है. पोल्ट्री किसानों  का कहना है कि पिछले दो साल में लगातार नुकसान के कारण कई छोटे और मझोले फार्म बंद हो गए. उन्हें दोबारा शुरू करना आसान नहीं है और इसमें समय व पैसा दोनों लगते हैं. इसलिए अंडों की कीमतें अभी कुछ समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं.

पोल्ट्री फार्मिंग में कितना आता है खर्च

पोल्ट्री कारोबार में उत्पादन बढ़ाने के लिए कई हफ्तों की तैयारी लगती है. पिछले कुछ सालों में दामों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, इसलिए किसान जल्दी या ज्यादा जोखिम लेने से बच रहे हैं. इसी वजह से उत्पादन में सुधार तो हुआ है, लेकिन इतना नहीं कि कीमतें तेजी से नीचे आ सकें. अंडों के दाम पहले जैसे कम स्तर पर न आने की एक बड़ी वजह बढ़ती लागत है. पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाला मक्का और सोयाबीन  पिछले कुछ सालों से महंगे होते जा रहे हैं. मौसम की मार, निर्यात की मांग और बढ़ती लागत इसका कारण हैं. एक पोल्ट्री किसान के कुल खर्च का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सिर्फ फीड पर जाता है.

कैसे महंगा हो जाता है अंडा

इस वजह से अंडों की न्यूनतम टिकाऊ कीमत अब बढ़ चुकी है. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, 6.5 से 7 रुपये प्रति अंडा से नीचे का रेट कई किसानों के लिए घाटे का सौदा है. यानी मौसमी मांग घटने के बाद भी कीमतें थोड़ी ही कम होंगी, इनमें बड़ी गिरावट की संभावना कम है. कई बड़े उपभोक्ता राज्य अपनी जरूरत के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बड़ी मात्रा में अंडे दक्षिण और पश्चिम भारत से आते हैं. ट्रांसपोर्ट, ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत जुड़ने से रिटेल बाजार तक पहुंचते-पहुंचते प्रति अंडा 20 से 40 पैसे और बढ़ जाते हैं.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के आंकड़ों के अनुसार, नामक्कल और होस्पेट जैसे बड़े थोक बाजारों में कीमतें ऊंची जरूर हैं, लेकिन फिलहाल स्थिर हैं, लगातार बढ़ नहीं रही हैं. यह एक अहम संकेत है. इसका मतलब है कि जब तक कोई नई परेशानी जैसे बीमारी का फैलना या फीड की कीमतों  में अचानक उछाल नहीं आता, तब तक अंडों के दाम अब बहुत ज्यादा बढ़ने की संभावना कम है. ज्यादातर पोल्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि जनवरी तक दाम मजबूत बने रहेंगे और फरवरी से मांग कम होने पर इनमें हल्की नरमी देखने को मिल सकती है.

क्या फिर से 5 रुपये पीस होगा अंडा

लेकिन जो उपभोक्ता यह उम्मीद कर रहे हैं कि अंडों के दाम फिर से 5 रुपये या 6 रुपये पर आ जाएंगे, उन्हें निराशा हो सकती है. हालांकि, बाजार की स्थिति अब बदल चुकी है. बढ़ती लागत, कम होते पोल्ट्री फार्म और स्थायी रूप से मजबूत मांग का मतलब है कि अंडे अब पहले जैसे बेहद सस्ते प्रोटीन नहीं रह गए हैं. असल में यह सर्दी भारत की फूड इकॉनमी  में आ रहे एक धीमे लेकिन पक्के बदलाव को दिखा रही है. दूसरे प्रोटीन विकल्पों के मुकाबले अंडे अभी भी किफायती हैं, लेकिन हमेशा सस्ते अंडे’ वाला दौर शायद खत्म हो रहा है. फिलहाल ठंड के मौसम में अंडे महंगे ही रहेंगे. जब कीमतें नीचे आएंगी भी, तो गिरावट हल्की होगी, अचानक नहीं. यानी बाजार बदलने से पहले अब नाश्ते की थाली को ही थोड़ा एडजस्ट करना पड़ेगा.

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Published: 26 Dec, 2025 | 12:13 PM

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